कुरुक्षेत्र जिला प्रशासन की ओर से कड़ी सख्ती के बावजूद किसान धान केे अवशेष जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। विभाग की ओर की जाने वाली कार्रवाई के डर के चलते किसान भले ही दिन के समय अवशेष जलाने से कुछ किनारा करने लगे हो, लेकिन रात को किसान धड़ल्ले से फसल अवशेष आग के हवाले कर रहे हैं।
जहां अधिकारी व कर्मचारी दिन ढलते ही अपने घरों की ओर निकलने लगते है वहीं किसान इसके साथ ही अवशेषों को जलाना शुरू कर देते हैं। जिसके कारण वातावरण में धुंए का गुब्बार सा बन रहा है। यह धुंआ इतना खतरनाक है कि स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। शाम होते ही ये गुब्बार शहर को अपनी आगोश में ले रहा है। लोगों की आंखों में जलन की शिकायत रहने लगी है तो वहीं सड़कों पर वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। रात को सड़कों के किनारे जलते धान के अवशेषों की वजह से रोड पर दिखाई नहीं देता, जिससे हादसे का भय बना रहता है तो वहीं लोगों को घुटन महसूस हो रही है।
बता दें कि अवशेष जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग और पर्यावरण विभाग ने विशेष निगरानी टीमें गठित की हैं। जो किसानों को धान के अवशेषों को जलने से रोकती है। अवशेष जलने वाले किसानों पर जुर्माना भी करती है। जिले में अब तक 11 किसानों पर जुर्माना लग चुका है। प्रशासन ने समस्या की गंभीरता को समझते हुए पटवारियों और ग्राम सचिवों को भी खेतों पर नजर रखने के आदेश जारी किये थे।
रात को भी की जा रही है निगरानी
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि अवशेष जलाने से रोकने के लिए पूरी सख्ती बरती जा रही है। हर खंड में टीमें बनाई हुई है ओर रात को भी निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए है। जो किसान अवशेष जलाते पाए जाते है उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है।