कुरुक्षेत्र। जिला अतिरिक्त व सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली एकमुश्त राशि वापस लेने के लिए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) की ओर दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के 22 अक्तूबर 2018 के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए कर्मचारी को मिलने वाली एकमुश्त राशि में से काटे गए 4,37,361 रुपये 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए।
कृष्ण लाल ने 1 जून 1976 को बिजली निगम में वर्क चार्ज मेट के रूप में नौकरी शुरू की। 30 मई 1981 को वे असिस्टेंट लाइनमैन (एएलएम) बने और 29 मार्च 2005 तक इस पद पर रहे। इस दौरान 23 साल से ज्यादा समय तक कोई प्रमोशन नहीं मिला। इसलिए निगम ने 2007 में उन्हें पहली और दूसरी आश्वासित कॅरिअर प्रगति (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) स्केल का लाभ दिया।
बाद में 29 मार्च 2005 को लाइनमैन और 1 जुलाई 2013 को असिस्टेंट फोरमैन (एएफएम) प्रमोट हुए। वे 31 मई 2015 को एएफएम से सेवानिवृत्त हुए। निगम ने 2013 में वेतन निर्धारण में विसंग का हवाला देते हुए एसीपी का लाभ वापस ले लिया और वेतन में वृद्धि के नाम पर एकमुश्त राशि में से 4,37,361 रुपये काट लिए। ट्रायल कोर्ट ने इसे गैरकानूनी माना और निगम को आदेश दिए थे कि कटी रकम वापस करें, पदोन्नति पर मिलने वाली वेतन वृद्धि दें, वेतन में हुई गलती को ठीक करें, पेंशन आदि लाभ सुधारें और 12 प्रतिशत ब्याज के साथ सब बकाया चुकाएं।
अपील में निगम ने कहा कि कृष्ण लाल पहले आरटीएम थे, एएलएम प्रमोशन मिल चुका था। इसलिए एएसीपी नहीं मिलनी चाहिए थी। कटौती से पहले नोटिस दिया गया था। अदालत ने ये तर्क खारिज कर दिए। अदालत ने कई पुराने फैसलों का हवाला दिया और निगम को राशि लौटाने का आदेश दिया व मुकदमा खर्च देने के भी आदेश दिए।