कुरुक्षेत्र। हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 10 किसान संगठनों के सैकड़ों प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास के निकट दूसरे दिन भी डटे रहे। मंगलवार को दिनभर भाषणों व रागनियों का सिलसिला चला। शाम होते ही किसानों ने अपने हाथ में मशालें उठा लीं और पुलिस की निगरानी में शहर की सड़कों पर तीन किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला। किसानों के प्रदर्शन के कारण पुलिस ने भारी बंदोबस्त के साथ नाकेबंदी की हुई है।
हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने दोपहर को प्रेस वार्ता की। इसमें बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ यह आंदोलन है। उन्होंने भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का कड़ा विरोध किया और इसे किसानों के लिए डेथ वारंट करार दिया। नेताओं का कहना है कि यह डील भारतीय कृषि को नुकसान पहुंचाएगी, इसलिए इसे तत्काल रद्द किया जाए। मोर्चे ने 26 मार्च को किसान भवन चंडीगढ़ में सेमिनार आयोजित करने का एलान किया है, जहां फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सहित अन्य मांगों पर चर्चा होगी। उसी दिन राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को मांग पत्र सौंपा जाएगा।
मोर्चे ने सभी किसान संगठनों से एकजुट होकर लड़ने की अपील की है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। किसान नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें मनवाईं जाएंगी और ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में मनदीप सिंह नथवान, लखविंदर सिंह औलख, अमरजीत सिंह मोहड़ी, जगदीप सिंह औलख, अशोक बलहारा, प्रिंस वैड़च, जगबीर घसौला, संदीप सिवांच, दिलबाग सिंह, बहादुर मैहला जैसे किसान नेता शामिल हैं।
किसान नेताओं ने कई प्रमुख मांगें दोहराईं
- फसलों पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी 2+50 प्रतिशत फॉर्मूला से एमएसपी निर्धारण और कानूनी गारंटी।
- सभी किसानों और खेत मजदूरों की संपूर्ण कर्ज माफी।
- नया बिजली कानून और सीड्स बिल रद्द किया जाए।
- बुजुर्गों का सम्मान भत्ता बहाल किया जाए, कोई बहाना न बनाया जाए।
- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से घोषित 23 फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाए जिसमें धान, नरमा, बाजरा, सूरजमुखी, मक्का, मूंग आदि शामिल हैं।
- धान घोटाले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बर्खास्तगी।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की कमियों को दूर किया जाए।
- यूरिया-डीएपी खाद समय पर उपलब्ध कराई जाए, नदियों-नालों की सफाई और घग्गर नदी के तटबंध मजबूत किए जाएं।
- किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट पांच लाख करने की अधिसूचना जारी की जाए।
- किसान आंदोलन की सभी लंबित मांगों को पूरा किया जाए।
कुरुक्षेत्र। किसान नेता पड़ाव स्थल पर आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए।- फोटो : Samvad
कुरुक्षेत्र। किसान नेता पड़ाव स्थल पर आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए।- फोटो : Samvad