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पर्यावरण संतुलन के लिए ठोस अपशिष्ट पदार्थों का सही निष्पादन जरूरी : प्रो. संजीव

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कुरुक्षेत्र। विजेता रहे प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते संस्थान निदेशक सहित अन्य सदस्य। संवाद - फोटो : mathura
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा पर्यावरण तथा स्थिरता विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका समापन शनिवार को हुआ। इसमें मुख्यातिथि विज्ञान संकाय के डीन प्रो. संजीव अरोड़ा रहे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए ठोस अपशिष्ट पदार्थों का सही निष्पादन जरूरी है।
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पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. जितेंद्र शर्मा ने कहा कि वे नवाचार के माध्यम से पर्यावरण एवं सतत विकास की दिशा में कार्य करें। इसके साथ ही उन्होंने कम उपयोग करना, पुन: उपयोग करना और पुन: चक्रित करने के थ्री आर सिद्धांत के बारे में भी बताया जो अपशिष्ट को कम करने और संसाधनों के संरक्षण में सहायक हैं। आयोजन सचिव डॉ. संदीप गुप्ता ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट साझा की।
सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों द्वारा सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रो. सुनीता दलाल, डॉ. मीनाक्षी नांदल, डॉ. अमिता शर्मा, डॉ. सोमबीर जाखड़, डॉ. राजकमल, प्रो. आशा गुप्ता, प्रो. डेजी बातिश, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. पूजा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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प्रतिभागियों को किया पुरस्कार राशि से सम्मानित
एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर पोस्टर प्रस्तुत करने की श्रेणी में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की श्रेया चहल व माइक्रोबायोलॉजी विभाग की पूनम शर्मा ने पहला पुरस्कार हासिल किया। वहीं काजल देवी वनस्पति विज्ञान विभाग व काजल चौहान जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने दूसरा तथा निधि अहलावत पर्यावरण विज्ञान विभाग एमडीयू रोहतक व शालिनी ओझा वनस्पति विज्ञान विभाग जाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं मौखिक प्रस्तुति में शुभांग भारद्वाज वैज्ञानिक बी केंद्रीय कागज एवं लुगदी अनुसंधान संस्थान सहारनपुर ने पहला, मोहिनी गोयल कुवि वनस्पति विज्ञान विभाग, अंशुल त्यागी दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दिल्ली ने दूसरा तथा प्रभजोत कौर कुवि जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा प्रज्ञा यादव दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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