कुरुक्षेत्र। जकार्ता में आयोजित संगोष्ठी में हिस्सा लेने के दौरान प्रो. वीएन अत्री। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय इंडो-पैसिफिक अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. वीएन अत्री ने 8 दिसंबर को जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित आसियान इंडो-प्रशांत दृष्टि संगोष्ठी : समुद्री संरक्षण और संवर्धन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें यह दायित्व केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से नामित किए जाने पर प्राप्त हुआ। प्रो. वीएन अत्री की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र के पैनल वक्ता के रूप में प्रो. अत्री ने नीली अर्थव्यवस्था के अवसर विषय पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने 1994 से 2025 तक नीली अर्थव्यवस्था के विकास, उसकी परिभाषा, उपयोगिता और वैश्विक महत्व पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने पर इंडो-पैसिफिक अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. वीएन अत्री को प्रोत्साहित किया। समुद्री संरक्षण, समुद्री परिवहन, तटीय विकास, खनिज संसाधनों के सतत दोहन और समुद्री पर्यटन जैसे विषयों पर प्रो. अत्री की ओर से दी गई विशेषज्ञतापूर्ण प्रस्तुति न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण है बल्कि भारत और आसियान देशों के बीच समुद्री सहयोग को नई दिशा प्रदान करने में भी सहायक होगी।
कुलपति ने 2026 को आसियान-भारत वर्ष समुद्री सहयोग घोषित किए जाने को भी भारत के समुद्री सहयोग, क्षमता निर्माण और नीली अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रो. अत्री की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एक बार फिर वैश्विक स्तर पर गौरव के साथ उभरा है। विश्वविद्यालय सदैव अपने विद्वानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग के लिए प्रेरित करता रहेगा।