कुरुक्षेत्र। 11वां आयुर्वेद दिवस पर मुख्यातिथि को सम्मानित करते विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य।
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में बुधवार को 11वें आयुर्वेद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद विषय पर पीजी स्कॉलर्स ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में आयुर्वेद को आधुनिक शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि आयुर्वेद की संहिताओं में दर्ज ज्ञान का आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन जरूरी है। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने बताया कि आयुर्वेद का ज्ञान प्रत्यक्ष, अनुमान और अनुभव पर आधारित है। उन्होंने डिजिटल तकनीक से इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावनाएं बताईं। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति, मुख्यातिथि डॉ. अभिमन्यु कुमार, कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता और प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने भगवान धन्वंतरि की पूजा से किया। नए सभागार का नाम राजर्षि निमी रखा गया। कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता ने भी आयुर्वेद को आधुनिक शोध से जोड़ने पर बल दिया।
आयुर्वेद के वैश्विक विस्तार पर जोर
मुख्यातिथि डॉ. अभिमन्यु कुमार ने आयुर्वेद चिकित्सकों के लिए प्रभावी संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता जैसे ग्रंथों के सिद्धांतों का वैज्ञानिक अध्ययन हो सकता है। आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के लिए मानकीकरण और दस्तावेजीकरण आवश्यक है। सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर भी ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर आयुर्वेदिक अस्पताल में प्रो. राजा सिंगला की अगुवाई में रक्तदान शिविर भी लगाया गया।