कुरुक्षेत्र। दिव्यांगजन कल्याण के सरकारी दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे। थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज आज भी सरकारी पेंशन की बाट जोह रहे हैं। दिव्यांग पोर्टल और फैमिली आईडी के बीच तकनीकी असंगति का खामियाजा सीधे इन रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।
पेंशन कहां से लगेगी अभी तक यह फैसला नहीं हो पाया। पीड़ित मरीज पेंशन के लिए कभी स्वास्थ्य विभाग तो कभी जिला समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं। पिहोवा वासी गुरदीप ने बताया कि उनका बेटा हीमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त है। इसके लिए सरकार ने पेंशन की घोषणा की थी। लेकिन करीब दो साल का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक बेटे की पेंशन नहीं लगी। पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकार उनके मुद्दों पर सिर्फ राजनीति कर रही है। घोषणाएं होती हैं लेकिन न दवाइयां समय पर मिलती हैं और न ही आर्थिक सहायता।
लाभार्थी शाहाबाद निवासी सतबीर ने बताया कि सरकार ने दो साल पहले पेंशन देने की बात कही थी। तब से लेकर अब तक हम न जाने कितनी बार समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं। पोर्टल या तो अपडेट नहीं होता या फैमिली आईडी लिंक नहीं होती।
थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के नोडल अधिकारी डॉ. कृष्ण दत्त का कहना है कि तकनीकी कारणों से पोर्टल पर पेंशन प्रक्रिया अटकी हुई है। नोटिफिकेशन तो जारी हो गया है लेकिन फैमिली आईडी और दिव्यांग पोर्टल के बीच तकनीकी खामी के चलते कई मामलों में लिंक नहीं बन पा रहा है। संबंधित विभाग मिलकर जल्द इसका समाधान करेंगे।