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अभिभावकों ने किया जिला शिक्षा अधिकारी का घेराव

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जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री का घेराव करते अभिभावक। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। निजी स्कूलों की मनमानी के विरोध में पैरेंट्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। पैरेंट्स एसोसिएशन ने बुधवार को लघु सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए नगराधीश चंद्रकांत कटारिया को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा और निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री का घेराव किया।
इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी के (आप पांच साल से बेवकूफ बने, इसमें मेरा क्या दोष है, आप सभी की आंखें बंद थीं) बयान पर अभिभावक नाराज हो गए। अभिभावकों ने कहा कि हमें नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन प्रशासन को सब पता था तो कार्रवाई क्यों नहीं की ? एनसीईआरटी संबंधी पुस्तकें लागू करने के हरियाणा शिक्षा निदेशालय के आदेशों के जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जो भी निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तक लगाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान जेपी सैनी ने बताया कि कई निजी स्कूलों की ओर से वार्षिक शुल्क मांगा गया है और नए शैक्षणिक सत्र में फीस में 10.13 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई। निजी स्कूल की ओर से लिए गए वार्षिक शुल्क वापस करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया था, जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों को पत्र जारी कर सिर्फ खानापूर्ति करने का काम किया। बताया कि अब एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को ई-मेल से शिकायत भेजकर सरकारी आदेशों का पालन न करवाने वाले अधिकारी और आदेशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव मयंक बजाज ने मांग करते हुए कहा कि निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाने वाले निजी स्कूलों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी के ढुलमुल रवैये के कारण निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाई है और एनसीईआरटी पुस्तकें न लगाकर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाने की सूची अभिभावकों को दी है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को ई-मेल से शिकायत भी दी गई थी, जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अभिभावक बोले - किससे करें फरियाद
अभिभावकों के आरोप लगाते हए कहा कि निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षा का व्यापारीकरण कर दिया है। आरोप लगाया कि झूठ बोलकर निजी स्कूल अभिभावकों से अवैध वसूली कर रहे हैं। अब न तो निजी स्कूल संचालक उनकी सुन रहे हैं और न ही सरकारी आदेशों को मान रहे। ऐसी परिस्थिति में वे अपने बच्चों को कहां लेकर जाए, किससे फरियाद करें।
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