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स्कूल से बच्चों का नाम काटने पर भड़के अभिभावक, लघु सचिवालय पहुंच किया प्रदर्शन

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शहर के निजी स्कूल संचालकों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए सैकड़ों अभिभावकों ने मंगलवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान अभिभावकों ने जहां निजी स्कूलों पर वार्षिक शुल्क जमा न कराने वाले करीब ढाई सौ बच्चों का स्कूल द्वारा नाम काटने का आरोप लगाया, वहीं मासिक फीस बढ़ोतरी कर और वार्षिक शुल्क जमा कराने के लिए दबाव बनाने के भी आरोप लगाए।
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इसी के विरोध स्वरूप अभिभावक एसोसिएशन के बैनर तले अभिभावक ही नहीं बच्चे भी मंगलवार सुबह एकजुट हुए और लघु सचिवालय पर पहुंचकर स्कूल संचालकों के खिलाफ नारेबाजी की। जिला प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार जयवीर रंगा ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन अभिभावकों ने उपायुक्त मुकुल कुमार से मुलाकात कराने की मांग रखी। सूचना मिलने पर उपायुक्त मुकुल कुमार अभिभावकों का ज्ञापन लेेने पहुंचे।
इस दौरान अभिभावकों ने ज्ञापन सौंपते हुए अपना दुखड़ा भी रोया। ज्ञापन में अभिभावकों ने बताया कि निजी स्कूल द्वारा लगभग 200 से 250 बच्चों का दाखिला रद्द करके उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। एसोसिएशन के प्रधान जेपी सैनी का कहना है कि निजी स्कूल आए दिन अपनी मनमानी कर अभिभावकों और बच्चों पर दबाव बना रहे हैं। इसकी वजह से अभिभावकों व बच्चों को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। आरोप लगाया कि स्कूल प्राचार्य द्वारा कहा गया है कि जब तक अभिभावक वार्षिक शुल्क के साथ ट्यूशन फीस जमा नहीं कराएंगे, तब तक बच्चों के नाम शामिल नहीं किया जाएगा, जबकि अभिभावक फॉर्म-6 के तहत ट्यूशन फीस देने को तैयार है।
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डेढ़ घंटा अभिभावकों ने किया इंतजार, फिर डीसी कार्यालय में हुई सुनवाई
उपायुक्त मुकुल कुमार से मुलाकात करने के लिए अभिभावकों ने करीब डेढ़ घंटा इंतजार किया। इसके पश्चात अभिभावकों का शिष्टमंडल उपायुक्त से मुलाकात करने उनके कार्यालय पहुंचा। यहां अभिभावकों ने अपना दुखड़ा रोते हुए निजी स्कूल संचालकों द्वारा उन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। उपायुक्त ने अभिभावकों की पीड़ा समझते हुए तत्काल फीस फंड रेगुलेशन कमेटी (अंबाला मंडल) के संबंधित अधिकारी से फोन पर बातचीत की और अभिभावकों की समस्या का शीघ्र समाधान कराने के निर्देश दिए। यही नहीं, उपायुक्त ने वहां उपस्थित जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री को सभी विद्यार्थियों के नाम वापस शामिल कराने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि वे खुद एक अभिभावक हैं। बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाएगा। इस संबंध में प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी।
दाखिल रद्द नहीं हुआ, सिर्फ 52 बच्चों को दिया था नोटिस: आश्री
जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री ने कहा कि अभिभावकों से बातचीत होने के बाद उन्होंने स्कूल की प्राचार्य से बातचीत की है। प्राचार्य के अनुसार स्कूल द्वारा किसी विद्यार्थी का दाखिल रद्द नहीं किया गया था, जबकि 52 विद्यार्थियों को नोटिस दिया गया था। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और निजी स्कूलों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जैसे कोर्ट के आदेश आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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