कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोव में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी स्थित पवित्र ब्रह्मसरोवर पर ज्येष्ठ मास की अमावस्या दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई व पूजा अर्चना की। सुबह से ही श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर पर जुटना शुरु हो गए थे। ब्रह्मसरोवर पर मेले जैसा माहौल था जहां श्रद्धालुओं द्वारा जमकर खरीदारी की गई उसके साथ ही पूजा अर्चना के साथ अपने पितरों की आत्मिक शांति के पिडंदान कर दान पुण्य किया गया।
मान्यता है कि धर्मनगरी में जरूरतमंद लोगों के किए दान का 100 गुना पुण्य मिलता है। जहां एक तरफ धर्मनगरी के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही उसके साथ मंदिर परिसर में पीपल की पूजा कर मन्नतें मांगी गईं उसके साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा शनि शिला का पूजन भी किया गया। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि के दिन ही शनिदेव का जन्म हुआ था। इस खास दिन पर पूरे विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने और व्रत रखने से कुंडली में शनि दोष दूर हो जाता है और जीवन से कई प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं। वहीं मनचाही मनचाही मनोकामनाएं भी पूरी होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी को भगवान शनि देव की पूजा अर्चना करनी चाहिए, क्योंकि शनिदेव महाराज सुख समृद्धि देने वाले देवता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को शनि देव का जन्म हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दान का भी अधिक महत्व है।
जगह- जगह लगाए गए भंडारे
शनि जयंती पर धर्मनगरी में जहां राहगीरों के लिए भंडारा लगाया गया था उसके साथ विभिन्न स्थानों पर गर्मी के मौसम को देखते हुए राहगीराें के लिए मीठे पानी की छबीलें लगाई गई थी।
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोव में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद