कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या के अवसर पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में श्रद्धालुओं ने सैकड़ों की संख्या में आस्था की डुबकी लगाई। सरोवर के तटों पर दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा। अमावस्या के चलते दूर-दराज से सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। उन्होंने स्नान और पूजा करने के बाद अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान कराया।
पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा और जमकर खरीदारी भी की। पुरोहित राजेश कुमार ने बताया कि सोमवार सुबह के समय चौदस थी, वहीं दोपहर बाद अमावस्या शुरू होने के कारण पवित्र ब्रह्मसरोवर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी।
श्रद्धालुओं ने सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर में अपने पितरों के नाम अर्पण कर दान पुण्य किया। शास्त्रों में वर्णित है कि महाभारत के समय पांडवों ने पिंडदान करने के लिए सोमवती अमावस्या का इंतजार किया था लेकिन वह नहीं आई थी। तब युधिष्ठिर ने उसे श्राप दिया था। अब कलयुग में हर माह सोमवती अमावस्या आती है ताकि श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मिक शांति हेतु तर्पण कर्मकांड व दान पुण्य कर सकें। तीर्थ पर किए दान का विशेष महत्व होता है। इसके चलते सोमवती अमावस्या जिसे पितृपक्ष की अमावस्या की कहते हैं, इस दिन पितरों की आत्मिक शांति निमित किया दान पुण्य का 100 गुना लाभ प्राप्त होता है।
श्रद्धालुओं ने दुखभंजन महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मंदिर, श्री देवी कूप मां भद्रकाली मंदिर में भी पूजा-अर्चना और दान पुण्य किया।
कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद