कुरुक्षेत्र। केयू में महिला शिक्षक द्वारा कथित तौर पर डॉ. बीआर आंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला बुधवार को फिर गहरा गया। छात्र-छात्राएं कक्षाएं छोड़कर सड़क पर उतर आए और वीसी कार्यालय पर पांच घंटे तक धरना देकर जमकर रोष जताया। जिसके चलते केयू प्रशासन ने महिला शिक्षक को हटा दिया तो छात्र-छात्राएं शांत हुए।
छात्र-छात्राएं सुबह ही रोज गार्डन में एकत्रित हुए, जहां से जुलूस की शक्ल में वीसी कार्यालय तक रोष जताते हुए पहुंचे। जहां पांच घंटे से भी ज्यादा धरना देकर रोष व्यक्त किया, जिसके चलते प्रशासन की भी सांसें फूली रही। छात्र-छात्राएं महिला शिक्षक को हटाने व कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। जबकि प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने बातचीत कर कमेटी के आने वाले निर्णय के बारे में बताया, लेकिन छात्र-छात्राओं की मांग थी, कि गठित की गई कमेटी आज ही फैसला दे, तभी आंदोलन समाप्त होगा। उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
बता दें कि 14 फरवरी को भी महिला शिक्षक के खिलाफ छात्र-छात्राओं ने तीन घंटे से अधिक समय तक वीसी कार्यालय का घेराव किया था, जिसको देखते हुए केयू प्रशासन ने कमेटी गठित कर जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद छात्र-छात्राओं ने धरने को समाप्त कर दिया था।
महिला शिक्षक को नौकरी से हटाया
प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के विरोध को देखते हुए केयू प्रशासन ने महिला शिक्षक को नौकरी से हटा दिया है, जिसके बाद ही छात्र-छात्राएं शांत हुए। केयू प्रोक्टर प्रो सुनील ढींगरा का कहना है कि जिस दिन यह मामला संज्ञान में आया था, उसी दिन से ही महिला शिक्षिका को कक्षाएं लेने से मनाही कर दी गई गई थी। अब उन्हें हटाए जाने के आदेश दिए गए हैं। वे शारीरिक विभाग में अस्थायी तौर पर ही कार्य कर रही थी। इस मौके पर साहिल बड़सीकरी, कीमती लाल, अमित हसनपुर, अनमोल रत्न, अमनदीप, जतिन, बिट्टू चौधरी, वर्षा, कामिनी, सूरज, अंकुश सहित अन्य मौजूद रहे।
अब केयू में आपत्तिजनक टिप्पणी की तो नपेंगे
केयू प्रशासन ने इस मामले से सबक लेते हुए सभी विभागों को पत्र जारी किया है। जिसमें निर्देशित किया है कि कोई भी विभाग का मुखिया व अन्य शिक्षक किसी भी महापुरूष, राष्ट्रीय प्रतीक व अन्य ऐसे संवेदनशील मामलों को लेकर किसी प्रकार की विवादित टिप्पणी नहीं करेगा। ऐसा करने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रोक्टर प्रो सुनील ढींगरा का कहना है कि किसी भी महापुरूष व राष्ट्रीय प्रतीक जैसे किसी संवेदनशील मामले को लेकर अनुचित टिप्पणी करना गलत है। हालांकि यह पहले भी हर विभाग के मुखिया से लेकर अन्य कर्मियों को अवगत है, लेकिन अब फिर पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है।