कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण के रथनुमा पहियों के साथ तैयार करवाए गए बैंच। संवाद
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण के जीवन व लीलीओं पर आधारित विश्व के एकमात्र माने जाने वाले श्रीकृष्ण संग्रहालय में पर्यटक अब अवलोकन के साथ-साथ सुकून के पल भी बिता सकेंगे। वे न केवल पेड़ों की छांव में आरामदायक बेंच पर बैठ सकेंगे बल्कि उनके मन मस्तिष्क में महाभारत के दौरान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गीता उपदेश व उनके रथ का भी अनुभव होगा। संग्रहालय की ओर से इसके लिए 50 खास बेंच तैयार करवाए गए हैं, जो इसी सप्ताह पर्यटकों के लिए उपलब्ध होंगे।
आरामदायक होने के साथ-साथ इन बेंचों के दोनों ओर श्रीकृष्ण के रथनुमा पहिये लगाए गए हैं। इससे पर्यटकों को रथ पर बैठे होने का अनुभव होगा। करीब दो साल के गहन मंथन के बाद ये रथनुमा बेंच तैयार करवाए गए हैं, जिनकी संख्या भविष्य में बढ़ाई जा सकती है। ये बेंच श्रीकृष्ण संग्रहालय परिसर में प्रवेश करते ही दिखाई देने लगेंगे, जो विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे।
हर रोज पहुंचते हैं करीब दो हजार पर्यटक
श्रीकृष्ण संग्रहालय में हर रोज करीब दो हजार पर्यटक पहुंचते हैं। संग्रहालय प्रभारी बलवान सिंह के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण के विचारों और आदर्शों के मद्देनजर 1987 में श्रीकृष्ण संग्रहालय की स्थापना की गई थी। यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। छुट्टियों व अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव जैसे आयोजन के दौरान यहां पर्यटकों का जमघट लग जाता है। ऐसे में यहां आने वाले हर पर्यटक को धर्मनगरी से वास्तविक थीम से जोड़ने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय का विषय श्रीकृष्ण, कुरुक्षेत्र और महाभारत है। इसमें श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप के साथ महाभारत के हर बड़े क्षण को चित्रित किया गया है।
पर्यटकों को थीम से जोड़ने का प्रयास : सेतिया
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ पंकज सेतिया का कहना है कि संग्रहालय में आने वाला हर पर्यटक पूरी तरह से महाभारत के दौरान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गीता के अमर संदेश के थीम से जुड़े, इसी के दृष्टिगत ही ये बेंच तैयार करवाए गए हैं। बोर्ड का प्रयास है कि पर्यटकों की रुचि बढ़े और गीता संदेश दुनिया भर में फैले।