कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी स्थित आयुर्वेदिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान (श्री कृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज ) में अब मरीजों को और बेहतर सुविधाएं मिलने वाली है। 120 बेड का यह अस्पताल अपग्रेड कर 170 बेड का किया जाएगा, जिसमें अब विशेष तौर पर वीआईपी आपात वार्ड भी होगा। इसके लिए अस्पताल के एक भवन पर दो और मंजिल बनाई जाएंगी तो अन्य निर्माण भी किया जाएगा। इसके लिए श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन ने न केवल प्रस्ताव तैयार किया है बल्कि इसे सिरे चढ़ाने के लिए विपणन बोर्ड को कार्य भी सौंप दिया है। यहां तक कि डेढ़ करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। यही नहीं अस्पताल के पुराने भवन का भी पूरी तरह से कायाकल्प किया जाएगा, जिसके साथ ही वर्तमान आपात वार्ड को भी अपग्रेड किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के इस प्रयास से न केवल आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यहां मरीजों को अधिक सहूलियत के साथ उपचार भी मिल सकेगा। यह पहली बार होगा जब अस्पताल नए रूप में दिखाई देगा। बता दें कि तत्कालीन प्रदेश सरकार ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए धर्मनगरी में पहला राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं कॉलेज शुरू किया था। पहले ये सन्निहित सरोवर स्थित नाबा हाउस में वर्ष 1992 तक चलता रहा, जिसके बाद सेक्टर आठ में इसे वर्ष 2000 में नए भवन में शिफ्ट किया गया था। अब श्री कृष्ण आयुर्वेदिक कॉलेज के साथ-साथ आयुष विश्वविद्यालय भी स्थापित किया जा चुका है, जो फिलहाल कॉलेज भवन में ही चलाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए गांव फतुहुपुर में 100 एकड़ जमीन पर निर्माण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय बनने के बाद आयुर्वेद चिकित्सा एवं अनुसंधान को और बढ़ावा मिलने लगा है। जहां हाल ही में श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल का नाम बदलकर आयुर्वेदिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान कर दिया गया वहीं यहां आयुर्वेद से लेकर प्राकृतिक चिकित्सा से हर प्रकार के रोगों का इलाज करने के लिए बड़ी पहल भी की गई है।
इसी माह शुरू होगी होम्योपैथी, योगा, प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपैथी) की ओपीडी
अस्पताल में होम्योपैथी, योगा, प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपैथी) की ओपीडी भी इसी माह से शुरू होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। हालांकि सिद्दा को लेकर परामर्श चिकित्सक की नियुक्ति इस प्रक्रिया के दौरान नहीं हो पाई, लेकिन अगले माह इसे पूरा करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की माने इन ओपीडी के साथ मरीजों को बेहतर इलाज भी यहां जल्द मिलने लगेगा।
अभी इन विभागों की रोजाना 350 ओपीडी
अस्पताल में वर्तमान समय में काया चिकित्सा, पंचक्रम, शल्य चिकित्सा, आंख, नाक, गला, स्त्री रोग, बाल रोग, स्वास्थ्य रक्षण एवं प्राकृतिक परीक्षण, क्रिया शरीर, मौलिक सिद्धांत के अलावा आपात वार्ड के चलते हर रोज करीब 350 ओपीडी रहती है। अब नई सुविधाएं शुरू होने पर यह ओपीडी दोगुना तक होने की उम्मीद जताई जा रही है। यही नहीं पहली बार ही वीआईपी आपात वार्ड भी होगा।
सुविधाएं बढ़ाने पर तेजी से किया जा रहा काम : कुलपति
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। अब 50 बेड और बढ़ाए जा रहे हैं तो वहीं वीआईपी आपात वार्ड भी तैयार कराया जाएगा। पहले से जारी बेड से लेकर अन्य सुविधाओं को भी नया रूप दिया जा रहा है, ताकि यहां मरीजों को और बेहतर उपचार अधिक सुविधाओं के साथ मिल सके। नई ओपीडी भी शुरू की जा रही है जबकि नए भवन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये भी संबंधित विभाग को जारी कर दिए गए हैं।