कुरुक्षेत्र। हरियाणा की तर्ज पर अब राजस्थान में भी पवित्र सरस्वती नदी के बहने की संभावना तलाश की जाने लगी है। इसके लिए वहां की सरकार न केवल हरियाणा के मॉडल को अपनाने के लिए आगे बढ़ी है बल्कि वैज्ञानिकों के साथ रायसुमारी कर योजना बनाई जाने लगी है।
राजस्थान सरकार की यह पहल गत दिवस बिरला विज्ञान अनुसंधान संस्थान जयपुर में एक बैठक में भी दिखाई दी, जहां हरियाणा सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच के साथ वहां के सिंचाई मंत्री सुरेश रावत ने गहन मंत्रणा की। करीब दो घंटे तक चली बैठक में हरियाणा में सरस्वती के फिर से हुए उद्गम से लेकर इसे अब कच्छ के मैदान तक पहुंचाने पर भी गंभीरता दिखाई। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि वहां के वैज्ञानिकों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही हरियाणा का दौरा कर सकता है।
हरियाणा सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह के मुताबिक बिरला विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महावीर पूनिया व वर्चुअल जुड़ने वाले अधिकारी इसरो के रिटायर्ड मुख्य सामान्य प्रबंधक डॉ. जेआर शर्मा और डॉ. बीके भद्रा, डॉ. सुल्तान सिंह, प्रो. एचएस शर्मा, डॉ. एससी धीमान आदि भी इस बैठक में शामिल हुए और सरस्वती नदी को हरियाणा के तर्ज़ पर राजस्थान में बहाने को लेकर एक योजना तैयार करने पर मंथन किया गया। यहीं नहीं वहां के सिंचाई मंत्री सुरेश रावत ने यह योजना मुख्यमंत्री भजनलाल के समक्ष रखे जाने पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी इस क्षेत्र में युगों युगों से बहती थी और अब इस नदी को धरातल पर लाने का काम हरियाणा के साथ राजस्थान सरकार ने शुरु किया है। अभी तक राजस्थान में पुष्कर झील गुजरात का सिद्धपुर बड़ा क्षेत्र सरस्वती के पैलियो चैनल पर आता है। यह हरियाणा से हनुमानगढ़ अनूपगढ़ से होते हुए कच्छ के रण में गिरती थी। ऐसे में इस पर भी दोनों सरकारें मिलकर काम करना चाहती है। धुमन सिंह बताते हैं कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी इस प्रोजेक्ट में काम करने के के लिए आदेश कर चुके हैं और राजस्थान सरकार की इच्छा शक्ति इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा सकती है और राजस्थान के सूखे क्षेत्र को हरा भरा बनाने में बहुत बड़ा काम कर सकती है।
उन्होंने कहा कि इस बैठक में मुख्य मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई जिस तरह से झेलम,रावी ब्यास सतलुज का पानी हरियाणा पंजाब राजस्थान की नदियों को दिया जा सकता है उसी तर्ज पर राजस्थान में इस नदी प्रोजेक्ट में काम करने के लिए इरिगेशन डिपार्टमेंट के मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग भुवन भास्कर अग्रवाल भी शामिल हुए। उन्होंने इस प्रपोजल को आगे बढ़ाने के लिए बात कही इस अवसर पर उनके साथ इस संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. पीघोष इस संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.महावीर पूनिया प्रमुख सुदूर संवेदन विभाग भी उपस्थित रहे।
इस मौके पर राजस्थान गवर्नमेंट के इरीगेशन मंत्री सुरेश रावत, बिरला विज्ञान अनुसंधान संस्थान जयपुर के सुदूर संवेदन विभाग प्रमुख डा. महावीर पूनिया और वर्चुअल जोड़ने वाले अधिकारी इसरो के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉ. जे आर शर्मा और डॉ. बी के भद्रा भी उपस्थित रहे।