कुरुक्षेत्र। मंडियों में धान की खरीद के बाद भीगी हुई फसल को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिले में करीब 40,500 मीट्रिक टन धान भीगने से किसान और आढ़ती परेशान हैं। मंडियों में जगह की कमी के कारण भीगे धान को सुखाने में दिक्कत आ रही है।
लंबे समय से बोरियों और ढेरियों में पड़े धान के दानों में अंकुर निकलने लगे हैं। इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने और किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। मंडियों में पहले से ही धान बोरियां लगी हैं, जिससे बारिश में भीगे धान को फैलाने के लिए जगह नहीं मिल रही। धान को समय पर नहीं सुखाया गया तो उसकी गुणवत्ता और बिगड़ सकती है। किसानों और आढ़तियों को फसल बचाने के लिए उठान में तेजी की जरूरत है। धान की खरीद और उठान के आंकड़े भी पिछले साल की समान अवधि से कम हैं।
जिले में धान खरीद और उठान की स्थिति
- 7,80,025 मीट्रिक टन धान की खरीद सरकारी एजेंसियों ने अब तक की है
- 6,69,070 मीट्रिक टन धान का अब तक हो चुका है उठान
- 1,10,955 मीट्रिक टन धान का अभी भी उठान बाकी है
- खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हैफेड ने क्रमशः 5,71,457 मीट्रिक टन और 2,08,568 मीट्रिक टन धान खरीदा है। दोनों एजेंसियों का उठान प्रतिशत भी करीब 86 और 85 फीसदी रहा है।
मार्केट कमेटी के सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि धान की खरीद और उठान में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। जिले के किसानों के गेटपास काटे जा रहे हैं। बारिश के दौरान जितना धान भीगा था, उसे सुखा लिया गया है। मंडी में पर्याप्त जगह भी उपलब्ध है, इसलिए जगह की कोई समस्या नहीं है।