कुरुक्षेत्र। एनआईटी में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा कंसल्टेंट नियुक्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ ने इन नियुक्तियों को लेकर कड़ा विरोध जाहिर करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि वे सोमवार से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ रहे हैं। उनका आरोप है कि संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों की उपेक्षा कर सेवानिवृत्त अधिकारियों को दोबारा जिम्मेदारी दी जा रही है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
संस्थान में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए दो कर्मचारियों को कंसल्टेंट के रूप में नियुक्त किया गया है, ऐसी नियुक्तियों को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है और वर्ष 2008 के एक मामले में इस प्रकार की नियुक्तियों पर सवाल उठाने के बाद कई कर्मचारियों को पद से हटाया भी गया है।
अब इस मामले को लेकर संघ ने एक बार फिर से शिक्षा मंत्रालय, संस्थान के निदेशक, रजिस्ट्रार और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना कि जब संस्थान में नियमित कर्मचारी मौजूद हैं तो सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं क्यों ली जा रही हैं। कर्मचारी संघ की ओर से प्रधान आर के मीना ने गैर-शिक्षक कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति, एमएसीपी और अन्य सेवा लाभों का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि वर्षों से पात्र कर्मचारी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने कहा है कि संघ की महासभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी आंदोलन को और तेज करेंगे।
2008 में भी उठा था यही विवाद, आंदोलन के बाद हटाने पड़े थे चार अधिकारी
एनआईटी कुरुक्षेत्र में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने का विवाद नया नहीं है। साल 2008 में भी संस्थान में सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर रखा गया था, जिसका कर्मचारियों ने उस समय भी विरोध किया था। आंदोलन बढ़ने के बाद 4 अगस्त 2008 को संस्थान प्रशासन को चार अधिकारियों को हटाने का फैसला लेना पड़ा था। इनमें तत्कालीन सहायक कुलसचिव (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन), सहायक कुलसचिव (परीक्षा), सुरक्षा अधिकारी और निदेशक के निजी सचिव शामिल थे, साथ ही एक स्टोरकीपर का कार्यकाल भी समाप्त कर दिया गया था।
उनका कहना है कि उस समय प्रशासन ने खुद माना था कि कर्मचारी संघ की आपत्तियों के बाद इन नियुक्तियों पर पुनर्विचार किया गया। दूसरी ओर जुलाई 2008 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी एनआईटी निदेशकों को पत्र जारी कर सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति पर गंभीर आपत्ति जताई थी और नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए थे। कर्मचारी संघ का कहना है कि जब 18 साल पहले इसी तरह की नियुक्तियां वापस ली जा चुकी हैं तो अब दोबारा उसी व्यवस्था को लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।
कामकाज प्रभावित न हो इसलिए रखे गए हैं कंसल्टेंट : डॉ. दिलबाग
एनआईटी कुरुक्षेत्र के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलबाग ने बताया कि संस्थान में वर्तमान में नियमित भर्तियां बंद हैं। ऐसे में संस्थान के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए दो कंसल्टेंट नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नई भर्तियां शुरू नहीं हो जातीं, तब तक संस्थान को अपने दैनिक और प्रशासनिक कार्य संचालित करने हैं। इसी आवश्यकता को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है।