कुरुक्षेत्र। एनआईटी में हुई चार आत्महत्या की घटनाओं के बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) ने सभी छात्रों को 19 अप्रैल यानी रविवार तक छात्रावास खाली करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद से एनआईटी में पढ़ने वाले करीब 15 विदेशी छात्रों की समस्या बढ़ गई है।
वे छात्र अब भारत में रह रहे अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से कुछ दिन रखने की अपील कर रहे हैं। क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण इनका अपने देश वापस जाना मुश्किल हो रहा है और जहाज का किराया भी इस कारण इतना बढ़ा दिया गया है कि यह बजट को प्रभावित कर रहा है।
आदेश जारी होने के बाद छात्रावास तेजी से खाली हो रहे हैं। रविवार देर शाम तक अलग-अलग छात्रावासों में रहने वाले करीब 5,400 छात्र-छात्राओं में से 4,400 विद्यार्थी रविवार शाम तक छात्रावास छोड़कर अपने घर निकल गए। बाकी करीब एक हजार के छात्रों में से अधिकतर ने रविवार देर रात या सोमवार देर शाम तक छात्रावास खाली करने की बात प्रशासन को कही है। कुछ विद्यार्थियों ने प्रशासन को अपनी टिकटें दिखाकर एक से दो दिन अतिरिक्त रुकने की अनुमति मांगी है। क्योंकि इनकी टिकट आगे की बुक हुई हैं। इस पर प्रशासन ने अनुमति देकर उन्हें जल्द से जल्द छात्रावास खाली करने की बात कही है।
विदेशी छात्रों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल है। नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, दुबई, ओमान और बहरीन आदि देशों से आए छात्र घर लौटने में असमंजस की स्थिति में हैं। फ्लाइट टिकटों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिसे वहन करना उनके लिए मुश्किल है। दुबई और ओमान के दो छात्रों ने बताया कि इरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के कारण फ्लाइट उपलब्धता और किराए दोनों प्रभावित हैं। एक छात्र ने कहा कि 70 हजार रुपये की टिकट भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
विदेशी छात्र अब अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या भारत में रहने वाले परिचितों से संपर्क साध रहे हैं ताकि वे अस्थायी रूप से किसी ठिकाने पर रह सकें। कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने कहा कि छात्रों के भले और परिसर में शांत माहौल बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। यह पहला मौका है जब एनआईटी में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों के कारण छुट्टियां घोषित की गई हैं और छात्रावास खाली कराने के आदेश दिए गए हैं।