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स्टार्टअप बनाने के लिए नई शिक्षा नीति है एक गेम चेंजर : राज्यपाल

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कुरुक्षेत्र। शिक्षा कुंभ का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए शिक्षा के लिए एक समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण की कल्पना करता है। यह नीति शिक्षा कुंभ के उद्देश्यों के अनुरूप कम उम्र से ही कौशल विकास उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करती है। ये विचार राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने व्यक्त किए।
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वे बुधवार को एनआईटी कुरुक्षेत्र डिपार्टमेंट ऑफ हॉलिस्टिक एजुकेशन, विद्याभारती संस्थान और श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के सहयोग से एनआईटी के शिक्षा कुंभ अर्थव्यवस्था में अकादमिक-संचालित स्टार्टअप की भूमिका पर (रेस 2023) में शिक्षा, नवाचार और उद्यमित्ता के परिदृष्य विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा कुंभ शैक्षिक नवाचार सहयोग और सशक्तिकरण का एक प्रतीक बनने का वादा करता है, जो शिक्षा को पुनर्जीवित करने और भारत के कालातीत सांस्कृतिक और दार्शनिक मूल्यों के साथ इसके संरक्षण को सुनिश्चित करने के हमारे मिशन को मजबूत करता है।
राज्यपाल ने कहा कि स्टार्ट अप बनाने के लिए नई शिक्षा नीति एक गेम चेंजर है। इसलिए नई शिक्षा नीति को जल्द अमल करे। केंद्र सरकार ने 2030 तक नई शिक्षा नीति को लागू करने का निर्णय लिया है, लेकिन प्रदेश सरकार ने 2025 तक हरियाणा में नई शिक्षा नीति को लागू करने का निर्णय लिया है। यह नीति अर्थव्यवस्था को आकार देने और नवाचार को बढ़ावा देने में अकादमिक-संचालित स्टार्टअप के महत्व के लिए कारगर है। शिक्षा महाकुंभ नवाचार उद्यमिता और कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक करीब 800 स्टार्टअप थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब एक लाख 16 हजार स्टार्टअप बन गए हैं।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक सरल, लचीले और बहु-विषयक पाठ्यक्रम पर जोर देती है, जो रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान कौशल को बढ़ावा देता है। एनआईटी निदेशक डॉ. वीवी रमना रेड्डी ने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में संस्थागत अनुसंधान गतिविधियों, उद्यमित्ता और स्टार्टअप संस्कृति को निर्देशित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विद्याभारती संस्थान नोर्थ जोन के जनरल सेक्रेटरी देश राज शर्मा ने कहा कि कुंभ भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। शिक्षा का मूल विचार सामूहिक चिंतन है। अश्वनी उपाध्याय ने विकसित संवैधानिक प्रतिमान की पृष्ठभूमि भारत की गौरवशाली विरासत की व्याख्या की और हमारी विरासत ज्ञान प्रणालियों का सम्मान करने और उन्हें पुन: जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राज नेहरू ने स्टार्ट अप के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि विद्यार्थियों को उद्योगों के साथ भी जोड़ें ताकि तकनीकी बातों के बारे में भी जानकारी हासिल हो सके। कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन चंडीगढ़ के सचिव स्वामी भीती महाराज ने कहा कि जीवन एक युद्धभूमि है, परिस्थितियों के अनुसार व्यक्तियों को संघर्ष करना चाहिए।
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