आज से आठ दिन बाद यानि 17 अक्तूबर से नवरात्रे शुरू हैं। इनमें खास तौर पर घरों या फिर धार्मिक स्थलों पर धार्मिक आयोजन करवाए जाते हैं। इनको करवाने को लेकर जागरण मंडलियों ने बुकिंग शुरू कर दी है। सरकार की हिदायतों के अनुुसार कुछ एक जगहों पर तो जगराते हो भी रहे हैं। वहीं, दूसरी और इन्हीं दिनों रामलीलाओं का मंचन भी किया जाता है, लेकिन अभी तक फिलहाल कमेटी सदस्यों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि उन्हें रामलीला करवाने को लेकर अनुमति मिलती है या नहीं। रामलीला मंचन में भी 10 दिन शेष बचे हैं। अगर अनुमति मिल जाती है तो रामलीला की तैयारियां गिने-चुने दिनों में ही करनी होंगी। हालांकि जिलेभर में कुछ जगहों पर रामलीला कमेटी सदस्यों ने रामलीला मंचन करवाने को लेकर अपने स्तर पर रिहर्सल शुरू करवा दी है। (संवाद)
7 माह बाद झांकी कलाकारों का रोजगार लौटेगा वापस
माता के जगरातों में कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए बाहर से आए कलाकारों द्वारा विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। अब सात माह बाद नवरात्रों में उनको भी माता के जगरातों के साथ बुकिंग मिलनी शुरू हो गई है। अब उनका रोजगार भी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है।
पहले मिलती थी 15-20 इस बार सिर्फ 2-3 बुकिंग : लक्खा
जागरण कलाकार कल्याण मंच के प्रधान लखबीर सिंह लक्खा ने बताया कि आम दिनों में जब नवरात्रे हुआ करते थे उनके पास एक माह में 15 से 20 बुकिंग आ जाया करती थीं, लेकिन इस बार कोरोना के चलते उन्हें अब तक सिर्फ 2-3 बुकिंग ही मिली हैं। वहीं पहले के मुकाबले अब बुकिंग में आधे रेट का फर्क आ गया है। लॉकडाउन ने जागरण कलाकारों के रोजगार को छीन लिया। इसके लिए उन्होंने एक मंच पर सभी कलाकारों को एकत्रित कर सरकार से मदद की गुहार भी लगाई थी, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। कहा थानेसर में करीब 40 पंजीकृत जागरण पार्टियां है, जोकि कोरोना के चलते खाली बैठी हैं।
आज से पहले कभी नहीं रुकी थी रामलीला : कुलवंत
श्रीलक्ष्मी रामलीला ड्रामेटिक क्लब प्रधान सुंदर लाल व मुख्य निदेशक कुलवंत सिंह भट्टी ने संयुक्त रूप से कहा कि आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि रामलीला न हुई हो। कोरोना के चलते वह रामलीला को लेकर असमंजस में थे तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन उन्होंने बताया कि फिलहाल इस बारे में उनके पास कोई गाइडलाइन नहीं आई है। अब अगर गाइडलाइन आ भी जाती है तो रामलीला नहीं हो पाएगी, क्योंकि रामलीला के लिए महीना पहले तैयारियां करनी पड़ती है और अब समय नहीं बचा। इस बार भगवान राम की आराधना की परंपरा को सुचारु रूप से चलाते हुए सुंदरकांड के पाठ और अन्य माध्यमों से भगवान राम की स्तुति की जाएगी।