बाबैन। अनाजमंडी में बिकने की इंतजार में सरसों। संवाद
कुरुक्षेत्र/बाबैन। सरकारी खरीद शनिवार को शुरू हो चुकी है लेकिन तीसरे दिन सोमवार को भी जिले के चारों केंद्रों लाडवा, शाहाबाद, बाबैन और इस्माईलाबाद में खरीद नहीं की जा सकी। हालांकि केंद्रों पर सरसों की आवक लगातार जारी है और सरकारी खरीद न होने से किसान निजी कारोबारियों को ही अपनी फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
सरकारी खरीद में इस बार बायोमीट्रिक सहित लागू किए गए नय नियम आड़े आ रहे हैं। प्रशासन तीसरे दिन तक भी व्यवस्था नहीं बना पाया है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों में भारी निराशा और रोष देखने को मिल रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण उन्हें अपनी फसल मजबूरी में निजी व्यापारियों को समर्थन मूल्य से कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान सुभाष चंद, कुलवंत सिंह, लाभ सिंह और अशोक कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जबकि निजी खरीदार 5800 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक ही खरीद कर रहे हैं। इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 200 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि तुरंत प्रभाव से सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।