कुरुक्षेत्र। विरासत द हेरिटेज विलेज मसाना में विरासत हेरिटेज व एसोसिएशन ऑफ हरियाणवी इन ऑस्ट्रेलिया और कला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय सांझी उत्सव में सबसे बेहतरीन सांझी अजरानी कलां की मुस्कान ने बनाई। उन्होंने 51 हजार रुपये का पहला पुरस्कार जीता। दूसरे स्थान पर कृष्णा कॉलोनी हांसी की प्रतिभागिता मिनाक्षी को 31 हजार रुपये का पुरस्कार मिला और बिहोली पानीपत की नीतू को 21 हजार रुपये का तीसरा पुरस्कार हासिल हुआ।
मुख्यातिथि राज्य बाल विकास परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने सभी विजेताओं को ये पुरस्कार दिए। उन्होंने कहा कि सांझी कला को बचाने के लिए विरासत ने जो प्रयास किया है, आने वाले दिनों में इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
हरियाणा की लोककला सांझी को बचाने के लिए महिलाओं की कला को संरक्षण देने की आवश्यकता है ताकि आधुनिकता के इस दौर में लोककला को संरक्षित किया जा सके। इस दौरान विरासत के निदेशक अभिनव पूनिया ने बताया कि सांझी कला प्रतियोगिता में 11 हजार रुपये के दो पुरस्कार सुखविंद्र कौर और निशा को वितरित किए गए जबकि 5100 के तीन पुरस्कार माया देवी, राधा एवं सुषमा जोशी को प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि 3100 के पांच पुरस्कार अन्नू, राजमीत कौर, किरन, नंदनी एवं सुनीता देवी को मिले। 2100 के पांच पुरस्कार अनीता, प्रीति, शांति, रिया एवं रीमा को मिले। अभिनव ने बताया कि 1100 के पांच पुरस्कार रमा, मिनाक्षी, निर्मला राठी, निशा, निवेदिता को प्राप्त हुए।
कार्यक्रम में डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि महिलाओं का लोककला के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाओं ने सांझी कला को बचाने के लिए जो योगदान दिया है उसको आने वाली पीढि़यां याद रखेंगी।
इस मौके पर भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश छिक्कारा ने कहा कि विरासत की ओर से आयोजित यह पांचवां सांझी उत्सव हरियाणा की लोककला को बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं एवं सरकार को भी आगे आना चाहिए। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि एवं एसोसिएशन ऑफ हरियाणवी इन ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि डॉ. दिनेश चहल ने कहा कि एएचए विदेश में रहकर हरियाणवी संस्कृति को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सांझी के इस आयोजन में एएचए की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निर्णायक मंडल के सदस्यों में डॉ. रणबीर सिंह फोगाट, प्रो. रामविरंजन तथा डॉ. तपेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विश्व की सबसे बड़ी सांझी का उद्घाटन
सांझी उत्सव के अवसर पर विश्व की सबसे बड़ी सांझी का उद्घाटन मुख्यातिथि सुमन सैनी ने किया। विश्व की सबसे बड़ी यह सांझी 30 फीट ऊंची तथा 20 फीट चौड़ी है। अभी तक पूरे विश्व में कहीं पर भी इससे बड़ी सांझी नहीं बनाई गई है। यह सांझी एनआईटी के कलाकार पवन तथा उसकी पूरी टीम के साथियों ने बना कर विरासत को समर्पित की है। नेशनल हाईवे से जाते हुए यह सांझी सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सांझी को समर्पित रहा हरियाणा के लोकरंग सांस्कृतिक संध्या सांझी के इस मेले में धूम मची हरियाणा की लोकरंग का सांस्कृतिक कार्यक्रम सांझी माता को समर्पित रहा। लोकरंग हरियाणा के इस कार्यक्रम में हरविंद्र राणा, प्रकाश मलिक, मिनाक्षी की टीम के 35 से अधिक कलाकारों ने हरियाणा की संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत की, जिसमें भगवान शिव की अराधना से लेकर सांझी माता तक की पूरी सांस्कृतिक यात्रा को हरियाणा के विविध लोकनृत्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर हरियाणा की सांस्कृतिक झलक को देखकर मुख्यातिथि सुमन सैनी रंगांरग प्रस्तुति को देखकर अभिभूत हो उठी। इस अवसर पर आठ साल की छोटी लडक़ी लावण्या ने हरियाणवी नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
हरियाणा सांस्कृतिक प्रदर्शनी को अभिभूत हो उठी श्रीमती सुमन सैनी
सांझी उत्सव के अवसर पर पुरातन विषय-वस्तुओं की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में पुराने बर्तनों के साथ-साथ खेतीबाड़ी की विषय-वस्तुओं की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। मुख्यातिथि सुमन सैनी ने प्रदर्शनी के अवलोकन के पश्चात कहा कि उन्होंने पहली बार ऐसी विषय-वस्तुओं को देखा है जो आज तक जीवन में उन्होंने देखी नहीं। इस मौके पर उन्होंने सौ साल पुराने बंटे को सिर पर रखकर संस्कृति के प्रति अपने समर्पण को अभिव्यक्त किया।
कुरुक्षेत्र। सांक्षी उत्सव में प्रस्तुति देते कलाकार। विज्ञप्ति- फोटो : mathura