कुरुक्षेत्र। श्री संस्कार जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष आचार्य रंगनाथ शास्त्री ने सेक्टर-आठ स्थित पार्क में उपस्थित महिला श्रद्धालुओं को अहोई व्रत के नियम बताए व कथा सुनाई।
शास्त्री ने महिलाओं को बताया कि मां अपने बच्चों के सुख- समृद्धि एवं कल्याण के लिए इस व्रत को विधि-विधान से व्रत रख पूजन के साथ पूरा करती है। अहोई का व्रत हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। रंगनाथ शास्त्री ने सभी को कथा सुनाते हुए कहा कि एक साहूकार था जिसके सात बेटे थे, सात बहुएं तथा एक बेटी थी। दिवाली से पहले कार्तिक बदी अष्टमी को सातों बहुएं अपनी इकलौती ननद के साथ जंगल मे खादान में मिट्टी खोद रही थी। वहीं स्याहू (सेई) की मांद थी। मिट्टी खोदते समय ननद के हाथ से सेई का बच्चा मर गया। स्याहू माता बोली कि अब मैं तेरी कोख बांधूंगी। तब ननद अपनी सातों भाभियों से बोली कि तुममें से मेरे बदले कोई अपनी कोख बंधवा लो। सब भाभियों ने अपनी कोख बंधवाने से इनकार कर दिया परंतु छोटी भाभी सोचने लगी कि यदि मैं कोख नहीं बंधाऊंगी तो सास नाराज होगी। ऐसा विचार कर ननद के बदले में छोटी भाभी ने अपनी कोख बंधवा ली।
रंगनाथ शास्त्री ने कहा कि इसके बाद जब उससे जो लड़का होता वो सात दिन बाद मर जाता। एक दिन उसने पंडित को बुलाकर पूछा मेरी संतान सातवें दिन क्यों मर जाती है। तब पंडित ने कहा कि तुम सुरही गया की पूजा करो सुरही गाय स्याऊ माता की भायली है, वह तेरी कोख छोड़े तब तेरा बच्चा जिएगा। इस अवसर पर सरोज सैनी, पंकज धमीजा, नीलम पंवार, राज कुमारी, प्रियंका देवो, रीना देवी, पूजा देवी एवं अन्य महिलाएं उपस्थित रही।