कुरुक्षेत्र। वेटिंग एरिया में बैठे गर्भवती के साथ आए परिजन। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिले में पिछले पांच वर्षों में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत लगातार बढ़ा है। वर्तमान में जिले में लगभग 35 प्रतिशत डिलीवरी ऑपरेशन के माध्यम से हो रही हैं। हर माह करीब 1400 महिलाएं बच्चों को जन्म देती हैं जिनमें से लगभग 450 बच्चे सिजेरियन डिलीवरी से पैदा होते हैं। सरकारी अस्पतालों में 10 प्रतिशत और निजी अस्पतालों में 25 प्रतिशत डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार अभिभावक कम बच्चों की चाहत में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते और कम समय व कम तकलीफ के कारण ऑपरेशन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके अलावा आधुनिक चिकित्सा तकनीक, संसाधनों की उपलब्धता और महिलाओं में शारीरिक श्रम की कमी भी इसके कारण हैं। जिले के 21 सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी की सुविधा है लेकिन केवल चार अस्पतालों में गायनेकोलॉजिस्ट और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है।
शहर की प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. रजनी गुप्ता बताती हैं कि ऑपरेशन से डिलिवरी के केस बढ़े हैं पर बहुत अधिक नहीं, लोग रिस्क कवर करना नहीं चाहते। डॉक्टर नॉर्मल डिलिवरी का ट्रायल करना भी चाहते हैं तो अभिभावक मना कर देते हैं। नॉर्मल डिलिवरी में इंतजार करना पड़ सकता है जबकि ऑपरेशन में बहुत ही कम समय लगता है। दूसरी सबसे अहम वजह यह है कि आज कल की अधिकतर महिलाएं शारीरिक श्रम से परहेज करती हैं। झाड़ू-पोंछे से लेकर खाना पकाने तक के लिए अलग-अलग मेड या सर्वेंट रखने लगे हैं।