संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। करीब डेढ़ माह पहले प्रदेश सरकार ने समय रहते नहरों की साफ-सफाई कराए जाने के आदेश दिए थे लेकिन जिला में आज भी नहरों को सफाई की दरकार है। 13 दिन बाद जुलाई माह के पहले सप्ताह में ही मानसून आने की उम्मीद है लेकिन जिम्मेदार आज तक भी बैठकों व दावों तक ही सिमटे हैं जबकि हकीकत इनसे कोसों दूर है।
जिला में दो मुख्य नरवाना ब्रांच व एसवाईएल नहर निकलती है तो वहीं बीचों बीच से सरस्वती नदी बहती है तो वहीं शाहाबाद, झांसा व इस्माईलाबाद से सटते हुए मारकंडा नदी बहती है। इसके अलावा जिला में करीब 20 अन्य छोटी नहरें है, जिनमें अधिकतर डिस्ट्रीब्यूट्री शामिल है।
हालांकि इस बार सिंचाई विभाग ने रावगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी के अलावा पिहोवा व इस्माईलाबाद क्षेत्र में बहने वाली छोटी नहरों को भी नया स्वरूप दे दिया है लेकिन हकीकत यह भी है कि विभाग के मुख्यालय के आगे से ही गुजर रही ज्योतिसर नहर भी पूरी तरह से अटी पड़ी है। यहीं से अधिकारी हर रोज गुजरते हैं, इसके बावजूद इस नहर की सुध नहीं ली जा सकी है।
सरस्वती नदी की सफाई का काम भी पूरा नहीं : सरस्वती नदी पर सफाई कार्य चलाया जा रहा है लेकिन कछुआ चाल से यह कार्य मानसून सीजन से पहले पूरा होने की उम्मीद नहीं है। अभी भी गांव बाहरी के समीप व झांसा रोड पुल के पास सरस्वती घास-फूस से अटी पड़ी है। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के अध्यक्ष धुमन सिंह किरमच का कहना है कि अधिकतर हिस्से में सफाई कर ली गई है और इसी माह बाकी कार्य पूरा हो जाएगा।