कुरुक्षेत्र। वर्ष 2014 में जब पहली बार प्रदेश में हमारी सरकार बनी तो गीता संदेश से ही प्रेरित होकर अनेक कड़े फैसले लिए गए। इसके परिणाम साकारात्मक सामने आए, जिसका हर किसी को फायदा हुआ। इसके लिए भले ही हमें अपने कार्यकर्ताओं से लेकर अन्य लोगों से भी लड़ाई लड़नी पड़ी। हमें पूर्ण विश्वास था कि गीता के दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम सभी के लिए बेहतर निर्णय ले सकते हैं और हुआ भी यही। गीता ने ही यह प्रेरणा दी कि हमें अपना कर्म करना चाहिए, फल की इच्छा नहीं।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में आयोजित विराट संत सम्मेलन में मुख्य अतिथि केंद्रीय उर्जा मंत्री मनोहर लाल ने गीता संदेश पर मंथन करते हुए कहा कि यही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहानी सुनाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति एक आश्रम में गाय छोड़कर गया तो शिष्यों ने स्वामी को इसके बारे में बताया, स्वामी ने कहा कि अच्छी बात है, सभी दूध पी सकेंगे। कुछ दिन बाद जब वह व्यक्ति गाय को वापस ले गया तो स्वामी ने फिर कहा कि अच्छी बात है कि हमें गोबर उठाने जैसे कार्य नहीं करने पड़ेंगे। यही गीता का संदेश है कि हालात जैसे भी हो, हमें विचलित नहीं होना चाहिए। हमें उसी में बेहतर मार्ग ढूंढ लेना चाहिए।
मनोहर लाल ने कहा कि अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ राजनीतिक लोगों को भी गीता का गहन मंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिए जाने की पहल की गई थी, जो आज उस स्वरूप पर पहुंच गई है। उन्होंने आह्वान किया कि हर संस्था, क्षेत्र को वर्ष में एक दिन जरूर गीता जयंती मनानी चाहिए।