फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: विद्यार्थियों को मातृभाषा व स्थानीय बोलियों से जुडे़ रहने का दिया संदेश

विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल रहे। इसमें विद्यार्थियों ने पंजाबी, हरियाणवी, राजस्थानी, भोजपुरी, बांग्ला और अफ्रीका सहित अन्य स्थानीय भाषा में प्रस्तुतियां दीं।
विज्ञापन

कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र ने कहा कि भारत का भाषा परिवार जितना वैज्ञानिक है, उसका मुकाबला संसार की कोई भाषा नहीं कर सकती। सभी भाषाएं अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन हिंदी और उसकी जननी संस्कृत को प्राचीन भारत के मनीषियों ने इतने वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया कि यह अद्भुत, अतुलनीय व अनुपम हैं। हिंदी एक धवनांतरण भाषा है, जो जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी जाती है। इसी कारण इसके उच्चारण औ अभिव्यक्ति में दोहरे अर्थ उपजने का संकट ही पैदा नहीं होता।

संस्थान के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि युवाओं को अपनी मातृभाषा और स्थानीय बोलियों के साथ जुड़े रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति की वास्तविक शक्ति, उसकी सच्ची वाणी, उसकी मातृभाषा होती है और हरियाणवी बोली का इतिहास हजारों साल पुराना है। पुष्ट प्रमाण सिद्ध करते हैं कि यह बोली नहीं यह भरी पूरी भाषा है। उन्होंने भारतीय वैदिक साहित्य से लेकर, अरबी, फारसी व अन्य बहुत-सी भाषाओं में हरियाणवी शब्दों के समानार्थक शब्दों का वर्णन कर विद्यार्थियों को हरियाणवी के संदर्भ में रोचक तथ्य बताए हैं।
विज्ञापन


डॉ. मधुदीप ने आंचलिक भाषाओं में अभिवादन का उच्चारण किया। कार्यक्रम में आस्ट्रेलिया के एसोसिएशन ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया के अध्यक्ष सेवा सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से कहा कि आप चाहे कितने बड़े ओहदा पा लें, लेकिन कभी मातृभाषा और बोली से नाता न तोड़ना। इसी के साथ अन्य पदाधिकारियों ने भी मातृभाषा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर डॉ. आबिद, डॉ. तपेश किरण, गौरव कुमार, अमित जांगड़ा, डॉ. प्रदीप राम, सचिन वर्मा, कार्यक्रम संयोजक रजत, नवीन, प्रकृति एवं मंच संचालक वैष्णवी और रिया मौजूद रहीं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें