कुरुक्षेत्र। महंगी शिक्षा और ट्यूशन फीस के बढ़ते बोझ के बीच सेक्टर-3 निवासी मीना जैन जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं। गृहिणी मीना जैन प्रतिदिन करीब 25 से 30 बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं। वह बच्चों को कॉपी, किताब और पेंसिल जैसी शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराती हैं।
जो बच्चे इन सामग्रियों को खरीदने में असमर्थ होते हैं, उनका खर्च वह स्वयं उठाती हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वह उन्हें प्रतिदिन बिस्किट आदि भी देती हैं। मीना जैन का मानना है कि शिक्षा ऐसा धन है जिसे कोई छीन नहीं सकता। यह ज्ञान जरूरत के समय जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है। इसी सोच के साथ वह बच्चों को पढ़ाने के लिए समय निकालती हैं। उनका प्रयास है कि बच्चों की आर्थिक स्थिति उनकी शिक्षा में बाधा न बने।
शिक्षा के मौलिक अधिकार का सम्मान
मीना जैन का कहना है कि स्कूलों की फीस और ट्यूशन का खर्च अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। उनकी यह पहल जरूरतमंद परिवारों को कुछ राहत प्रदान कर रही है। वह चाहती हैं कि बच्चों को पढ़ने का अवसर मिले और वे शिक्षा से वंचित न रहें। शिक्षा को मौलिक अधिकार मानते हुए, वह बच्चों को केवल पढ़ाई में मदद नहीं करतीं। वह उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं।