कुरुक्षेत्र। मलयेशिया के धर्मगुरु सेक काई ली महाथेरो के नेतृत्व में मतावलंबियों का 40 सदस्यीय दल धर्मनगरी पहुंचा, जहां उनका ब्रह्मसरोवर पर जोरदार स्वागत किया गया। सबसे पहले यह दल ब्रह्मसरोवर के साथ ही निर्माणाधीन बौद्ध स्तूप पहुंचा, जहां करीब आधा घंटा तक इसे बेहद बारीकी से निहारा तो इसके बाद ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर गीता उपदेश स्थली, सन्निहित सरोवर सहित विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी अवलोकन किया।
इसके साथ ही पुरुषोत्तमपुरा बाग में विशाल श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ के साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। धर्मनगरी के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को देख यह दल गदगद हो उठा। हालांकि यह दल देर रात को यहां पहुंच गया था, लेकिन सुबह होने पर करीब तीन घंटे तक ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया, जिसके उपरांत यमुनानगर के लिए रवाना हो गए। इस दल में एक नन वुशान व चार अन्य महिलाएं भी शामिल रही।
इस दौरान दल के अन्य सदस्यों के साथ-साथ अवेकनिंग हर्मिटेज टेंपल केदाह एवं मलयेशिया के धर्मगुरु सेक काई ली महाथेरो ने कहा कि यहां ऐतिहासिक व धार्मिक संस्थान बेहद सुंदर व दर्शनीय है। इन्हें पूरी योजनागत तरीके से सहेजा गया है। अन्य प्रदेशों की अपेक्षा यहां इन ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को देखने से कुछ अलग ही महसूस होता है। उन्होंने यहां के लोगों की भी जमकर सराहना की और कहा कि यहां के लोगों का स्वभाव हर किसी का दिल जीत लेने वाला है।
बता दें कि जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से हरियाणा के बौद्ध स्तूपों की चर्चा की थी। इस सम्मेलन से वापस अपने देश वापस जाने के उपरांत मलेशिया के प्रधानमंत्री ने अवेकनिंग हर्मिटेज टेंपल केदाह मलयेशिया के धर्मगुरु सेक काई ली महाथेरो को हरियाणा के बौद्ध स्तूपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिसके चलते ही वे यहां पहुंचे। ब्रह्मसरोवर तट पर पूरे दल का कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से अशोक रोशा, कैप्टन परमजीत सिंह व श्रीकृष्ण संग्रहालय के क्यूरेटर रहे राजेंद्र सिंह राणा ने बौद्ध का पत्ता व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
नहीं मिला बौद्ध स्तूप का इतिहास
जैसे ही मलयेशिया के धर्मगुरु सेक काई ली महाथेरो व अन्य मतावलंबि बौद्ध स्तूप पहुंचे तो यहां निर्माण कार्य चल रहा था। इसके चलते यहां इसका इतिहास भी उन्हें कहीं पढ़ने को नहीं मिल पाया, लेकिन श्री कृष्ण संग्रहालय के क्यूरेटर रहे राजेंद्र सिंह राणा ने उन्हें बौद्ध स्तूप के साथ-साथ अन्य स्थलों के बारे में भी बेहद बारीकी से जानकारी दी।