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Kurukshetra News: कुवि कृषि और प्लास्टिक अपशिष्ट से बनाएगा ग्रीन हाइड्रोजन

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कुरुक्षेत्र। कुवि का द्रोणाचार्य द्वार। संवाद
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राजरानी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) कृषि अवशेषों, थर्माकोल और प्लास्टिक जैसे अपशिष्ट पदार्थों से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक एक्स-रे फोटोइलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी (एक्सपीएस) विदेश से करीब सात करोड़ की लागत से उपकरण मंगाया जाएगा। जिसकी मदद से शोधार्थी अपशिष्ट पदार्थों पर भी गहन शोध कर सकेंगे।

केंद्र सरकार की नेशनल रिसर्च फंडिंग (एनआरएफ) योजना के तहत कुवि को 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। देशभर के सात चुने गए उच्चस्तरीय शोध संस्थानों में आईआईटी रोपड़ (हब) के साथ कुरुक्षेत्र विवि भी शामिल है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य कृषि अवशेषों, प्लास्टिक और थर्माकोल जैसे बायोमास मैटीरियल से ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के लिए नए मार्ग खोलना है। वैज्ञानिक इन अपशिष्ट पदार्थों को संशोधित कर कार्बन आधारित इलेक्ट्रोड तैयार करेंगे। जिनका उपयोग उन्नत बैटरियों में किया जाएगा। ये इलेक्ट्रोड ऊर्जा संग्रहण क्षमता को बढ़ाएंगे और उनकी दीर्घकालिकता को सुनिश्चित करेंगे। इस परियोजना के तहत ऐसी सामग्रियों का विकास किया जाएगा, जिनका उपयोग सुपरकैपेसिटर, बैटरी इलेक्ट्रोड के लिए किया जा सकेगा।
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इसी के साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, फोटो इलेक्ट्रोकेमिकल का उत्पादन करने के लिए पानी के विभाजन के लिए इलेक्ट्रोड बनाने के लिए सामग्री तैयार की जाएगी। यह कार्य डॉ. सुमन मेहंदिया की देखरेख में पूरी टीम द्वारा किया जाएगा, जिसमें डीन आरएनडी प्रो. संजीव अग्रवाल का भी निर्देशन रहेगा। इस शोध से न केवल ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बल मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम होगा। विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित होगा। वे प्रयोगशाला में थ्योरी के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। (संवाद)


बॉक्स, फोटो
प्लास्टिक और जैविक कचरे से मिलेगी निजात
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. सुमन मेहंदिया का कहना है कि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश को प्लास्टिक और जैविक कचरे से निजात दिलाने में सहयोग करेगी। इसी के साथ स्वच्छ ऊर्जा समाधान की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने में एक मजबूत कदम है। इससे व्यावसायिक उपयोग भी संभव होगा, जिससे देश को ऊर्जा संकट से भी राहत मिल सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि विद्यार्थी अपने अनुभवों को इसके माध्यम से टेस्ट कर पाएंगे।
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बॉक्स, फोटो 30
परियोजना की तैयार की जा रही रूपरेखा : प्रो संजीव
शोध एवं विकास अधिकारी प्रो. संजीव अग्रवाल का कहना है कि एनआरएफ योजना के तहत कुवि को 10 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई है, जिसमें अत्याधुनिक एक्स-रे फोटोइलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी (एक्सपीएस) को विदेश से खरीदा जाएगा और इसके लिए प्रयोगशाला बनाई जाएगी। इसे खरीदने सहित आगामी कार्य की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। किस देश से एक्सपीएस को खरीदा जाएगा, यह तय किया जाएगा। इस प्रयोगशाला के स्थापित होते ही कुवि शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

कुरुक्षेत्र। कुवि का द्रोणाचार्य द्वार। संवाद

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