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भारतीय संस्कृति, मानवीय चेतना के महान प्रतीक हैं महर्षि वाल्मीकि : प्रो. असीम घोष

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कुरुक्षेत्र। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सोमवार को थानेसर में भगवान वाल्मीकि के प्रकट दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य और मानवीय चेतना का महान प्रतीक बताया। राज्यपाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि के रूप में सम्मान प्राप्त है।
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उनकी अमर रचना रामायण को आदिकाव्य का दर्जा दिया गया है। रामायण जीवन-मूल्यों, कर्तव्यबोध, त्याग और मर्यादा की अनुपम कृति है। यह सत्य, त्याग और मर्यादा के पालन पर जोर देती है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने भगवान वाल्मीकि छात्रावास में कमरों के निर्माण का शिलान्यास किया। उन्होंने दो कमरों के लिए 15 लाख रुपये देने की घोषणा भी की। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
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कृष्ण बेदी ने दिया एकता का संदेश, सर्वसमाज के सहयोग से ही उत्थान संभव : सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि कोई भी समाज अकेले तरक्की नहीं कर सकता। सर्वसमाज मिलकर ही किसी वर्ग, समाज और प्रदेश का उत्थान आसानी से कर सकते हैं। भगवान वाल्मीकि जी ने भी अपने अनुयायियों को यही संदेश दिया है कि समाज में प्रेम, भाईचारा और समानता से ही राष्ट्र मजबूत बनता है।
कुरुक्षेत्र की धरती का महाभारत काल से ही भगवान वाल्मीकि के नाम से संबंध रहा है। यहां वाल्मीकि आश्रम वर्षों से स्थापित है और वर्ष 1958 से इस आश्रम में छात्रावास संचालित किया जा रहा है। इस छात्रावास ने प्रदेश को कई विधायक, मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी दिए हैं। राज्यपाल स्वयं एक शिक्षाविद रहे हैं। आश्रम में आने से छात्रावास के विद्यार्थियों को शिक्षा और मार्गदर्शन का और अधिक लाभ मिलेगा। देश-प्रदेश में विपक्ष लगातार झूठ बोलकर भ्रम फैला रहा है। जनता को गुमराह करने की साजिश की जा रही है, इसको दूर करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 5 नवंबर को करनाल में रोड शो करके जवाब देंगे।
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