कुरुक्षेत्र। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है। यह पर्व पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है। श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं और विधि-विधान से व्रत रखते हैं।
इस वर्ष शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 22 सितंबर से हो रहा है। महाअष्टमी 30 सितंबर को और महानवमी 1 अक्तूबर को मनाई जाएगी। नवरात्र का यह पर्व कलश स्थापना से प्रारंभ होता है, जो शुभ मुहूर्त में की जाती है।
ज्योतिषाचार्य रामराज कौशिक ने बताया कि घटस्थापना का मुहूर्त सुबह छह बजकर नौ मिनट से आठ बजकर छह मिनट तक रहेगा। इस अवधि में एक घंटा 56 मिनट का शुभ समय उपलब्ध होगा। यदि कोई सुबह स्थापना न कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है। यह समय सुबह 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
महालक्ष्मी राजयोग का संयोग
पंडित बलराज कौशिक ने बताया कि इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी को समृद्धि, धन और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यह वाहन आने वाले समय में समाज में समृद्धि और ज्ञानवृद्धि का संकेत है। इस बार नवरात्रि के अवसर पर एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे महालक्ष्मी राजयोग कहा जाता है। शुक्र की राशि तुला में चंद्रमा और मंगल का संयोग धन और संपत्ति की प्राप्ति का मार्ग खोलेगा। यह योग कुछ खास राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और खुशियों की सौगात लेकर आएगा।
शारदीय नवरात्रि की तिथियां
22 सितंबर – प्रतिपदा, मां शैलपुत्री पूजा
23 सितंबर – द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
24-25 सितंबर – तृतीया, मां चंद्रघंटा पूजा
26 सितंबर : चतुर्थी, मां कूष्मांडा पूजा
27 सितंबर : पंचमी, मां स्कंदमाता पूजा
28 सितंबर : षष्ठी, मां कात्यायनी पूजा
29 सितंबर : सप्तमी, मां कालरात्रि पूजा
30 सितंबर : महाअष्टमी, मां महागौरी पूजा
1 अक्तूबर : महानवमी, मां सिद्धिदात्री पूजा
2 अक्तूबर : व्रत पारण, दुर्गा विसर्जन, दशहरा