पिहोवा। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में रविवार को वसंत पंचमी के अवसर पर मुख्य कार्यक्रमों के अंतिम दिन पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रही। सरस्वती तट पर शिल्प कला व संस्कृति का महाकुंभ दिखाई दिया। शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत को देखने के लिए महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों ने आस्था के साथ डुबकी लगाई। इस महोत्सव के हर क्षण को यादगार बनाने के लिए पिहोवा ही नहीं आसपास के गांव व शहरों के तीर्थ यात्रियों का संगम भी देखने को मिला। अहम पहलू यह है कि धार्मिक, कला और संस्कृति के साथ-साथ आस्था के केंद्र के रूप में आज तीर्थ स्थल को देखा गया।
महोत्सव के अंतिम दिन हरियाणा के हर जिले और झारखंड, बिहार व अन्य राज्यों से आए शिल्पकारों की शिल्पकला की लोगों ने जमकर सराहना की। यहां पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से लगाए गए 100 से ज्यादा स्टाॅलों पर शिल्पकला को सजाया गया था। इस शिल्पकला को देखने के साथ-साथ विभिन्न उत्पादों को खरीदने के लिए लोगों ने छुट्टी के दिन अपना सारा समय सरस मेले में बिताया। विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने सरस्वती तीर्थ के तट पर रंगोली बनाई, इसमें मां सरस्वती को लेकर बनाई गई रंगोली आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर सिटी पब्लिक स्कूल, एसबीएसडी स्कूल, किडजी पब्लिक स्कूल, बीएसएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अमर पब्लिक स्कूल, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पिहोवा के विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
पिहोवा। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में रंगोली बनाती छात्राएं। संवाद- फोटो : mathura
पिहोवा। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में रंगोली बनाती छात्राएं। संवाद- फोटो : mathura
पिहोवा। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में रंगोली बनाती छात्राएं। संवाद- फोटो : mathura