कुरुक्षेत्र। देश के विभिन्न राज्यों सहित विश्व स्तर पर गीता का प्रचार प्रसार कर रहे अंतरराष्ट्रीय गीता मिशन ओडिशा के अध्यक्ष संत डॉ. स्वामी चिदानंद ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में गीता का संदेश दिया। भगवान श्री कृष्ण ने कर्म के साथ कल्याण का मार्ग बताया है। भगवान श्री कृष्ण की हर लीला का इस धरती पर विशेष संदेश एवं महत्व है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल बांसुरी बजाना ही नहीं जानते अपितु शंख बजाना भी जानते हैं। बांसुरी अथवा वंशी आनंद की प्रतीक है। स्थिर जीवन की प्रतीक है व शांत और सुखी जीवन की प्रतीक है तो शंख एक ललकार, एक उद्घोष और अन्याय, अत्याचार, अधर्म के विरुद्ध एक विद्रोह का प्रतीक है।
डाॅ. स्वामी चिदानंद ने कहा कि हमारी सहनशीलता यदि अधर्म को प्रश्रय दे रही हो तो वो स्वयं के साथ साथ संपूर्ण मानव जाति के लिए भी अति अनिष्टकारी और कष्टकारी बन जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का वंशीनाद मौन की ओर संकेत करता है। शंखनाद विद्रोह की ओर, विद्रोह अंधविश्वास के साथ, विद्रोह कुंठित परंपराओं के साथ, विद्रोह अत्याचारियों के खिलाफ, विद्रोह अन्यायियों और स्वार्थ में जकड़ी राजसत्ता के खिलाफ है।