कुरुक्षेत्र। परशुराम चौक पर जयंती मनाते पदाधिकारी एवं सदस्य। स्वयं
कुरुक्षेत्र। परशुराम दल ने भगवान परशुराम चौक के निकट एकजुट होकर जन्मोत्सव मनाया। इससे पूर्व दल सदस्यों ने गीता धाम गौशाला में गऊओं को हरा चारा खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद चौक पर पूजन करके भोग लगा प्रसाद वितरण किया। जिलाध्यक्ष डॉ. महावीर कौशल ने कहा कि पृथ्वी पर आततायियों का विनाश करके धर्म की स्थापना के लिए सतयुग एवं त्रेता युग के संधिकाल में वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान परशुराम आवेशावतार के रूप में धरा पर अवतरित हुए।
भृगुवंश में महर्षि जमदग्नि एवं माता रेणुका के पुत्र के रूप में भगवान राम धरा पर अवतरित हुए। आततायियों के विनाश के लिए भगवान शिव से परशु रूपी शस्त्र प्राप्त करके परशुराम के नाम पड़ा। उनको चिरंजीवी माना जाता है। उन्होंने त्रेता व द्वापर युग में समय-समय पर उपस्थित दर्ज की है। कलियुग में अभी तक दृष्टिगोचर नहीं हुए, क्योंकि कलियुग में सारी मर्यादाएं टूट रही है। अतः मर्यादा को स्थापित करने वाले भगवान ये कैसे देख सकते हैं।
माना जाता है कि कलियुग में मर्यादा स्थापित करने के लिए जब कल्कि अवतार होगा, तब भगवान परशुराम उसको शस्त्र की शिक्षा देंगे। जिला महासचिव डॉ. सुभाष कौशिक बोले कि उनके जीवन चरित से प्रेरणा लेते हुए बच्चों को शस्त्र एवं शास्त्र का ज्ञान देना चाहिए। अशोक शर्मा ने विशाल भंडारा दिया। इस अवसर पर ग्रामीण जिलाध्यक्ष परीक्षित कौशिक, शहरी जिलाध्यक्ष प्रह्लाद शर्मा, उपाध्यक्ष संजीव शर्मा, महाबीर शास्त्री, नीलकंठ, प्रेमचंद शर्मा और संजय शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।