कुरुक्षेत्र। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वीरवार को जिला जेल में लोक अदालत का आयोजन किया। इसमें सात मामलों में सुनवाई की गई। इनमें तीन मामलों को मौके पर निपटाते हुए अदालत ने तीन बंदियों को रिहा किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने कहा कि इस तरह से लोक अदालत में मामलों के निपटान से अदालतों का कीमती समय बचता है। लोक अदालत में संगीन आरोपों के अपराधियों के मामलों की सुनवाई नहीं होती। इसमें सिर्फ छोटे अपराधों के आरोपियों के मामलों को सुना जाता है, ताकि जांच में देरी के चलते वे बंदी लंबे समय तक जेल में बंद न रहें। कई मामलों में देखा जाता है कि छोटे अपराध के आरोपियों को कानून के मुताबिक उनके जुर्म की जितनी अधिकतम सजा होती है, उससे अधिक समय वे जेल में बिता चुके होते हैं और उनके मामलों की जांच उसके बाद भी जारी रहती है।
इस प्रकार के मामलों को लोक अदालत में रखने से न्याय में देरी नहीं होती है और ऐसे मामलों की वजह से जेल की क्षमता से ज्यादा बंदी जेल में रह रहे हैं, जिसके चलते जेलों व सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। लोक अदालत से ऐसे मामलों में सबूतों व तथ्यों के आधार पर मामलों का तुरंत निपटान किया जाता है। इससे लोगों का न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास और प्रगाढ़ हो जाता है।