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Kurukshetra News: 14 दिन बाद खत्म हुई वकीलों की हड़ताल,न्यायिक कार्य सुचारू

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कुरुक्षेत्र। बैठक के बाद सुप्रिम कोर्ट परिसर में सीजेआई के साथ ​छायाचित्र लेते वकील। एसोसिएशन
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की जिला अदालतों में पिछले चौदह दिनों से जारी वकीलों की हड़ताल सोमवार को समाप्त हो गई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ ने बार काउंसिल के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद वकीलों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। हड़ताल खत्म होने से हजारों वादकारियों को राहत मिली है और न्यायिक कार्य सुचारू हो गया है।
बार काउंसिल के पदाधिकारियों और शीर्ष न्यायिक अधिकारियों के बीच सोमवार दोपहर बाद अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद गतिरोध खत्म हो गया। इस उच्च स्तरीय बैठक में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ बार काउंसिल के शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी जिलों के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी इसमें शामिल हुए। कुरुक्षेत्र बार एसोसिएशन के प्रधान धर्मेंद्र अत्री और बार काउंसिल के सदस्य राजेंद्र जुनेजा ने बैठक में भाग लिया। उन्होंने जिले के वकीलों का प्रतिनिधित्व किया और अपनी चिंताओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा। धर्मेंद्र अत्री ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों के शिष्टमंडल को सकारात्मक और ठोस भरोसा दिया। मुख्य न्यायाधीश ने आश्वस्त किया कि जल्द ही मौजूदा विवादित नीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। एक नई जनहितैषी और वकील-हितैषी नीति लाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नई नीति तैयार होने तक कोई नया अनुबंध नहीं किया जाएगा।
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हड़ताल से 21 हजार मामले प्रभावित
वकीलों की चौदह दिन की हड़ताल से जिला अदालतों में करीब 21 हजार मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई। हर रोज औसतन 1500 मामले सुनवाई के लिए लगते हैं। हड़ताल के कारण इन सभी मामलों में बिना सुनवाई के अगली तारीख दे दी गई। इससे जेल में बंद बंदी और कैदियों की जमानत याचिकाएं प्रभावित हुईं। अन्य फौजदारी और नागरिक मुकदमों की सुनवाई भी अटकी रही।
वादकारियों को हुई परेशानी
पिछले दो सप्ताह से कामकाज ठप होने के कारण अदालतों में नए मामलों का अंबार लग गया था। सबसे ज्यादा परेशानी उन वादकारियों को हुई जिनकी जमानत याचिकाएं, स्टे ऑर्डर और अन्य आवश्यक मामलों की सुनवाइयां अटकी थीं। जेलों में बंद कैदियों की रिहाई में देरी हुई। गंभीर मुकदमों में तारीखों पर आ रहे दूर-दराज के लोगों को भारी मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। वादकारी लगातार अदालतों के चक्कर काटते रहे, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।
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वकीलों ने काम पर लौटने का लिया निर्णय
कुरुक्षेत्र बार के सदस्य राजेंद्र जुनेजा ने शीर्ष नेतृत्व से मिले आश्वासन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ठोस भरोसे के बाद सभी वकीलों ने तत्काल प्रभाव से आंदोलन समाप्त कर दिया है। वकीलों ने आम जनता को और असुविधा से बचाने के लिए काम पर लौटने का निर्णय लिया। इस कदम से न्यायिक प्रक्रिया में आई बाधा दूर हुई है। अब अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई फिर से शुरू हो सकेगी।
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