संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। भारतीय संस्कृति, भाषा एवं भारतीयता राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आत्मा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आत्मा में भारतीय परंपरा के अनुरूप भारतीय भाषाओं के अंदर शिक्षा, सभी के लिए समान शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा का प्रावधान है। यह बातें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहीं।
वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस की ओर से विश्वविद्यालय के संबंधित महाविद्यालयों के मास्टर प्रशिक्षकों के लिए एनईपी के क्रियान्वयन पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विजन है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 2025 तक पूरे हरियाणा में लागू करना है। भारत का शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन इतिहास रहा है। प्राचीन काल में तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी में विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती थी। इसके अलावा चरक, चक्रपाणि, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, ब्रह्मगुप्त, चाणक्य, पतंजलि, नागार्जुन, गौतम, पिंगला, शंकरादेव, गार्गी, मैत्री आदि महान विद्वानों व वैज्ञानिकों ने विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया है।
कुलपति ने कहा कि पूरी शिक्षा नीति विद्यार्थी एवं शिक्षक केंद्रित है। इसे लागू करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में इसे लागू करने के लिए पूरी रूपरेखा पहले ही बना ली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार पाठ्यक्रमों का निर्माण किया गया है। ककेयू की डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर आधारित पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों में एनईपी के प्रति जागरूकता लाना है।
उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इस पर एक वर्ष से काम कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप इसे लागू करने का ढांचा तैयार किया जा चुका है। केयू ने विश्वविद्यालय कैंपस में यूजी कोर्स में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि एनईपी को लागू करने के लिए हर कॉलेज के लिए फ्रेमवर्क अलग होगा। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, डीन एजुकेशन प्रो. अरविंद मलिक, आईआईएचएस के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार गुप्ता, डॉ. विवेक चावला, प्रो. पवन शर्मा, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. अनिता दुआ, प्रो. रीटा, प्रो. अश्वनी कुश, प्रो. परमेश कुमार, डॉ. महासिंह पूनिया, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, डॉ. अश्वनी मित्तल आदि मौजूद रहे।