बिजनौर के गांव रावली के रपटे पर आए पानी से गुजरता युवक।
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प्रदेश में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र में हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट में स्थिति बेहद ही डराने वाली है। खास कर कुरुक्षेत्र और गुड़गांव जिले में भविष्य में पीने का पानी तक नहीं मिलने का अंदेशा जताया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश में गुड़गांव का जल स्तर 28 मीटर तक गिर चुका है। कुरुक्षेत्र का जल स्तर 24.5 मीटर तक नीचे जा चुका है। ऐसे में इन दोनों जिलों में जल संकट गहराने का अंदेशा बड़ गया है। चौंकाने वाले बात यह है कि यह रिपोर्ट मानसून के दौरान आई है, जब जल स्तर बढ़ने की उम्मीद रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो कुरुक्षेत्र में हर वर्ष एक सेंटीमीटर से ज्यादा जल स्तर गिर रहा है। अत्यधिक गंभीर स्थिति पिछले एक दशक से सामने आ रही है। भूजल स्तर गिरने केे पीछे जहां अंधाधुंध जल दोहन को माना जा रहा है तो इसके पीछे सरकार व प्रशासनिक स्तर पर सार्थक रूप से कोई कदम न उठाया जाना भी है। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से सभी सरकारी विभागों को वर्षा का पानी भी रिचार्ज किए जाने के निर्देश दिए हुए हैं, लेकिन ये निर्देश यहीं सार्थक होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। अधिकांश विभागों में यह योजना पूरी तरह से ठप पड़ी है तो वहीं कई अधिकारी गंभीर होती जा रही इस समस्या से ही अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र के सभी ब्लॉक हैं डार्क जोन में
लगातार गिरते जा रहे भू-जल स्तर की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जिले के सभी खंडों को डार्क जोन में शामिल किया है। थानेसर में भू-जल स्तर 32 मीटर, पिहोवा में 33, बाबैन में 38, लाडवा में 30 व शाहबाद में 40 मीटर पर है। ऐसे हालात में नए सबमर्सिबल ट्यूवबेल लगाए जाने पर भी कई क्षेत्रों में पाबंदी लगाई हुई है।
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यह बेहद ही चिंताजनक स्थिति है। हालात को देखते हुए धान की फसल पर नियंत्रण करने की जरूरत है। कृषि क्षेत्र में पानी की सबसे अधिक खपत धान की फसल में ही होती है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को धान की बजाय कम पानी की लागत वाली फसलों के प्रति आकर्षित करे।
- डॉ. जेएन भाटिया, कृषि विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र
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जिस दर से भूजल में गिरावट हो रही है, इससे बड़े संकट की आहट सुनाई पड़ रही है। ऐसे हालात रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हमें पीने के पानी के लिए भी तरसना पड़े। हर व्यक्ति को पानी बचाने के प्रयास करने चाहिए। इसके लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाने की आवश्यकता है।
- सतेंद्र यादव, भूजल सेल के विशेषज्ञ