कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कैंपस का नजारा
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केयूके के हर छात्र का योगदान
विश्वविद्यालय की 126वीं अकादमिक परिषद की बैठक में 2024 में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था कि डिग्री प्राप्त करने से पहले छात्रों के लिए पौधा लगा उसका रखरखाव करना अनिवार्य होगा। केयूके और इसके संबधित कॉलेजों से हर साल लगभग 75 हजार छात्र विभिन्न कोर्सेज में उत्तीर्ण होते हैं। ऐसे में हर वर्ष 75 हजार नए पौधे धरती की हरियाली में योगदान देंगे। युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने के लिए अहम कदम उठाया गया है। इस मुहिम की शुरुआत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विवि में पौधारोपण कर गत वर्ष की थी। पहले ही दिन विवि परिसर में 3000 पौधे रोपित किए गए थे।
वन्य जीवों और जैव विविधता का संरक्षण
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का करीब 475 एकड़ में फैला परिसर न केवल शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। 40 एकड़ का वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र विश्वविद्यालय का गौरव है, जहां किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाता। यहां करीब 110 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। वन्य जीव प्राणी विभाग इस जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जीरो वेस्ट कैंपस बनाने का है लक्ष्य
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि विश्वविद्यालय को जीरो वेस्ट कैंपस बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए सेनिटेशन, हार्टिकल्चर, बॉटनी और एनवायरमेंटल स्टडीज संस्थानों के समन्वय से कार्य किया जा रहा है। उनका मानना है कि कुवि जैसा सुंदर, स्वच्छ और हरित कैंपस देश-विदेश में अद्वितीय है। उनकी योजना है कि कैंपस से कोई भी वेस्ट बाहर न जाए, उसे रिसाइकल और रियूज के माध्यम से फिर से उपयोग में लाया जाए। विश्वविद्यालय सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।