फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केयू में शिक्षक हड़ताल पर, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित

Tue, 22 Sep 2015 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
केयू में मोटी फीस जमा करके पढ़ाई करने आए विद्यार्थियों के लिए इन दिनों हालात ठीक नहीं हैं। नए सेशन की कक्षाएं शुरू होते ही पहले खुद छात्रों ने और अब शिक्षकों ने हड़ताल कर दी है। पिछले कई दिनों से अध्यापन कार्य पूरी तरह ठप्प चल रहा है। अध्यापकों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया है।
विज्ञापन


नियमित कक्षाओं में रेगुलर टीचर नहीं आ रहे, कई कक्षाएं कांन्ट्रेक्चुअल टीचर संभाल रहे हैं। छात्र संगठनों तथा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने इस समस्या को काफी गंभीर बताया और कहा कि यूनिवर्सिटी में तो ऐसे हालात नहीं बनने चाहिए।

विद्यार्थियों की ये रही प्रतिक्रिया
बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा रूमन ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से रेगुलर टीचर क्लास नहीं ले रहे। लगातार चार कक्षाएं खाली जा रही हैं। सिलेबस भी टाइस से पूरा करना है। मांगें टीचर्स की पूरी होनी हैं और स्टडी लॉस विद्यार्थियों का हो रहा है। केयू प्रशासन को शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्या को समय रहते सुलझा लेना चाहिए।
विज्ञापन

 
एमफिल की छात्रा मंजू जाखड़ ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई नाम की चीज दिखाई नहीं दे रही। आसपास तथा दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। न सरकार और न ही केयू प्रशासन शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की मांगों को समय रहते पूरा करने में ही विद्यार्थियों की भलाई है।

एमबीए द्वितीय वर्ष की छात्रा नीरजा नागिल ने कहा कि पढ़ाई का माहौल खराब हो रहा है। कई लेक्चर खाली जा रहे हैं। केयू अधिकारियों को समस्याएं समय रहते सुलझा लेनी चाहिए। यूनिवर्सिटी इतिहास विभाग की छात्रा ज्योति ने कहा कि कई दिनों से कक्षाएं रेगुलर नहीं लग रहीं। समय बीतता जा रहा है। ऐसे में स्लेबस समय पर निपटाना भी चुनौती की तरह होगा।

यूनिवर्सिटी कॉलेज की बीकॉम की छात्रा प्रीति ने बताया कि कुछ कक्षाएं लगती हैं, कई खाली निकल जाती हैं। कक्षाएं न लगने के कारण पढ़ाई से मन दूर होता जा रहा है। विद्यार्थी तो पढ़ने आते हैं, लेकिन कोई रेगुलर शिक्षक पढ़ाने नहीं आ रहा। केयू प्रशासन को विद्यार्थी हित में कार्य करते हुए समस्या का समाधान कर देना चाहिए।

हक की लड़ाई के साथ विद्यार्थियों की ओर भी देखें शिक्षक: एबीवीपी  
छात्र संगठन एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुनील भारद्वाज ने कहा कि शिक्षकों का हक के लिए लड़ना ठीक है, लेकिन विद्यार्थियों की तरफ भी देखना जरूरी है। स्टडी टाइम में पढ़ाएं और बाद में बेशक प्रदर्शन करें। विद्यार्थियों की कक्षाएं लेनी चाहिए। समस्या का समाधान करने के लिए शिक्षकों और प्रशासन को रास्ता निकलना चाहिए। यदि शिक्षकों की कुछ अच्छी जायज मांगें हैं, तो उन पर भी केयू प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।  

सरकार तथा केयू प्रशासन को समस्या पर ध्यान देना चाहिए: इनसो
छात्र संगठन इनसो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव जसविंद्र खैरा ने कहा कि हरियाणा सरकार को न विद्यार्थियों, न कर्मचारियों और न ही शिक्षकों की चिंता है। सरकार का केवल चुनाव पर ही ध्यान है। अध्यापकों की यदि कोई समस्या है तो सरकार के शिक्षा विभाग तथा केयू प्रशासन उन्हें हल करें। विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है, जोकि सुचारू होनी चाहिए।

धरने और प्रदर्शन में निकल रहा समय : डीएएसएफआई
छात्र संगठन डीएएसएफआई नेशनल कोर कमेटी के सदस्य रविंद्र ढांडा का कहना है कि केयू प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए। जायज मांगों को पूरा करें। विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब हो रही है। मोटी फीस जमा करवाने के बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई ढंग से नहीं हो पा रही, जिस पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। दो महीने विद्यार्थियों और शिक्षकों के धरने प्रदर्शन में निकल गए। प्रशासन को जायज मांगों को पूरा करके कक्षाएं सुचारू करानी चाहिए।

पढ़ने के लिए आ रहे विद्यार्थी लौट रहे मायूस: बीवीएम
छात्र संगठन भारतीय विद्यार्थी मोर्चा (बीवीएम) के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान गहलोत ने बताया कि जिस तरह से टीचर हड़ताल पर हैं, विद्यार्थियों का काफी नुकसान हो रहा है। विद्यार्थी पैसा खर्च करके यूनिवर्सिटी आते हैं, लेकिन उन्हें बिना पढ़ाई किए मायूस लौटना पड़ रहा है। केयू प्रशासन को शिक्षकों के साथ बातचीत कर समाधान निकालना जरूरी है।

वर्जन 
भूख हड़ताल पर गए प्राध्यापकों को कई बार वार्ता के लिए कॉल किया गया, लेकिन वे नहीं आए। प्राध्यापकों की मांगों को लेकर विशेष वाहक के जरिये कुछ दस्तावेज भी डायरेक्टर हायर एजुकेशन को भेज दिए गए हैं और कुलपति स्वयं चंडीगढ़ में उनकी मांगों को पूरा कराने के लिए स्वयं प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही मामले को आपस की बातचीत कर सुलझा लिया जाएगा।
विज्ञापन

डॉ. प्रवीण सैनी, कुलसचिव, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें