प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के हाथों से ए ग्रेड का तमगा दो वर्ष पहले छिन चुका है, लेकिन उसे वापस पाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन चिंतित नजर नहीं आ रहा है।
हालात यह है कि यूनिवर्सिटी वेबसाइट से लेकर अन्य सरकारी दस्तावेजों पर यूनिवर्सिटी के ए ग्रेड का खूब ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन हकीकत में यूनिवर्सिटी का ए ग्रेड जनवरी 2014 में ही समाप्त हो चुका है। पिछले दो वर्षों से यूनिवर्सिटी की लचर व्यवस्था के कारण नेशनल एक्रेडिएशन एवं एसेसमेंट काउंसिल (नेक) को ग्रेड पाने के लिए आवेदन तक ही नहीं किया है। इसलिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यप्रणाली के बारे में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
किसी भी कॉलेज अथवा यूनिवर्सिटी के लिए नेक की ग्रेडिंग अनिवार्य है और इस ग्रेड पर ही यूनिवर्सिटी अथवा कॉलेज की प्रतिष्ठा भी बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी को नेक की ओर से पहली बार 2004-09 में जहां बी ग्रेड मिला था, वहीं 2009-14 वर्ष में ए ग्रेड से नवाजा गया था। ए ग्रेड पाने के बाद पांच वर्ष के दौरान यूनिवर्सिटी ने खूब वाहवाही भी लूटी थी, लेकिन अब यूनिवर्सिटी के हालात बदल गए हैं।
यूनिवर्सिटी को मिला ए ग्रेड जनवरी 2014 में समाप्त हो चुका है। इसके बाद यूनिवर्सिटी को दोबारा से ग्रेड पाने के लिए नेक में आवेदन करना था। जिसके लिए यूनिवर्सिटी को एकेडमिक रिपोर्ट्स अर्थात एसएसआर (सेल्फ स्टडी रिपोर्ट्स) तैयार कर नेक को भेजनी होती है। इसके बाद नेक की ओर से टीम यूनिवर्सिटी विजिट के लिए आती है।
कमाल की बात यह है कि 2 वर्ष से नेक में ग्रेडिंग के लिए आवेदन ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नहीं किया है। अब 2016 भी शुरू हो चुका है। यूनिवर्सिटी प्रशासन अभी नेक के दौरे के लिए ही तैयार नहीं है और अभी तक एसएसआर भी नहीं भेजा गया है।
यूनिवर्सिटी के हाथों से खिसक सकता है
पांच वर्ष से ए ग्रेड पर पैर जमाए खड़ी यूनिवर्सिटी के हाथों से यह तमगा खिसक सकता है। हालात ऐसे हैं कि यूनिवर्सिटी में बहुत सारे महत्वपूर्ण पदों पर नियमित नियुक्ति होना अनिवार्य है, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभाग कार्यवाहक मुखियाओं के भरोसे चल रहे हैं।
ऐसे में यूनिवर्सिटी के एसएसआर रिपोर्ट में इन पदों पर नियमित नियुक्ति कैसे दिखाई जा सकती है। इसके अलावा भी कई अन्य कारण ऐसे हैं जिनमें यूनिवर्सिटी के हाथों से ए ग्रेड जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से ये हैं-
- यूनिवर्सिटी में नियमानुसार प्रोफेसर और टीचिंग स्टाफ के करीब 48 फीसदी पद खाली हैं।
- यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार कुल स्टाफ का महज 10 फीसदी ही कांट्रेक्ट पर रखा जा सकता है, लेकिन यूनिवर्सिटी कांट्रेक्ट टीचर्स के भरोसे ही चल रही है।
- पिछले एक वर्ष से टीचर्स के साक्षात्कार नहीं हुए हैं।
- यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दाखिले भी इस बार करीब तीन माह देरी से किए जा रहे हैं।
- एनसीटी की ओर से एमएड कोर्स की मंजूरी अभी तक नहीं आई है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की एक्रेडिएशन कमेटी के साथ हाल ही में कुलपति ने बैठक की है और उन्हें जल्द से जल्द एसएसआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटी) की ओर से एमएड कोर्स की मान्यता के लिए काफी समय से इंतजार किया जा रहा है। लेकिन वहां से अभी मंजूरी नहीं आई है। मार्च तक मंजूरी आने की पूरी उम्मीद है। इससे पूर्व नेक के पास एसएसआर नहीं भेजा जा सकता है। केयू की नेक ग्रेडिंग के लिए डीन (एकेडमिक) के नेतृत्व में कमेटी कार्य कर रही है।
-डॉ. प्रवीण सैनी, रजिस्ट्रार, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र।