हरियाणा के कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में नेशनल हाईवे 44 पर आखिरकार राहगीरों की राह सुगम हो गई है। हालांकि यह राह अंबाला तक ही सुगम हुई है जबकि आगे चंडीगढ़ व पंजाब आदि के लिए डायवर्ट रूटों से ही जाना पड़ेगा।
अंबाला से दिल्ली साइड खोलने के लिए आलाधिकारियों ने जिला प्रशासन को शनिवार शाम को ही आदेश दे दिए थे, लेकिन बारिश के बीच पोकलेन मशीन शनिवार को मुख्य बैरिकेड ध्वस्त करने में असफल रही थी और रविवार सुबह डीएसपी रणधीर सिंह, एसएचओ ललित कुमार और ट्रैफिक एसएचओ सुखदेव की उपस्थिति में जेसीबी ब्रेकर मशीन और पोकलेन की मशीन से मुख्य बैरिकेड को ध्वस्त करने का कार्य शुरू हुआ। चार घंटे तक कड़ी मशक्कत कर कंकरीट की बैरिकेडिंग हटाई जा सकी।
दिल्ली-पानीपत से अंबाला साइड जाने वाले बड़े-छोटे सभी वाहन अब सीधा जा सकेंगे, जबकि पंजाब-चंडीगढ़ जाने वाले सभी बड़े-छोटे वाहनों को साहा से पंचकूला जाना होगा और उसके बाद आगे का सफर तय करना होगा।
ट्रैफिक एसएचओ सुखदेव सिंह ने कहा कि अब जिला ट्रैफिक पुलिस बड़े वाहनों को पिपली से लाडवा साइड डायवर्ट नहीं करेगी, बल्कि वाहनों को शाहाबाद में मारकंडा नदी के बाद वाया साहा भेजा जाएगा, जिसके बाद उनका मिलकमाजरा टोल बचेगा और सफर में भी राहत मिलेगी।
जाम से राहगीरों को राहत
किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए प्रदेश सरकार के आदेशों के बाद मारकंडा नदी पर बने तीनों पुलों को बंद किया गया था, जिसके बाद बड़े वाहनों को पिपली से लाडवा-रादौर-दोसड़का-पंचकूला और छोटे वाहन शाहाबाद से बराड़ा-दोसड़का-पंचकूला का रास्ता ले रहे थे। प्रशासन ने वीरवार से पहले नलवी-ठोल रोड पर बने पुल और दिल्ली-अंबाला साइड मारकंडा नदी के पुल को पहले ही खोल दिया था। तत्पश्चात जीपीएस चलने के बाद अंबाला-पंजाब-चंडीगढ़ साइड से दिल्ली-पानीपत आने-जाने वाला हर छोटा वाहन शाहाबाद के रास्ते ही जा रहा था और शाहाबाद में नेशनल हाईवे पर कई-कई किलोमीटर तक लंबा जाम लगने लगा था।
चढूनी पांच को बनाएंगे रणनीति
उधर भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने अपने गुट की प्रदेश स्तरीय बैठक पांच मार्च को जाट धर्मशाला में बुलाई है, जिस दौरान हालात पर चर्चा करते हुए आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।