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पांच स्थानों पर होता है कलियुग का वास : शास्त्री

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आरडब्ल्यू जिंदल ग्लोबल सिटी एवं श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति की ओर से आयोजित सेक्टर-29 जिंदल सिटी के क्लब में श्रीमद्भागवत कथा जारी रही।
दूसरे दिन पर कथावाचक अनिल शास्त्री ने बताया कि राजा परीक्षित शिकार के लिए जंगल गए। वहां उन्होंने देखा कि एक बैल और एक गाय आपस में कुछ बातें कर रहे हैं। भागवत पुराण में बताया गया है कि धर्म के देवता बैल रूप में और पृथ्वी देवी गाय के रूप में वहां मौजूद थी। तभी राजा परीक्षित ने देखा कि एक मुकुट पहना व्यक्ति धर्म रूपी बैल को डंडे से पीट रहा है और गाय को लात मार रहा है।
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कथावाचक शास्त्री ने बताया कि गाय और बैल को इस तरह पीटता देख राजा परीक्षित क्रोधित हो उठे और पास आकर बोले, पापी तुम इन दोनों को क्यों मार रहे हो, रे पापी तू कौन है। मेरे राज्य में तुम्हें ऐसा करने का साहस कैसे हुआ मैं इसकी सजा तुम्हें अवश्य दूंगा। इतना कहकर राजा परीक्षित ने तलवार निकाल ली और कहा आज तेरी मौत निश्चित है। अब तू मुझसे नहीं बच सकता। राजा परीक्षित के हाथों में तलवार को देख वह व्यक्ति डर से कांपने लगा फिर बोला महाराज मैं कलियुग हूं और यहां वास करने आया हूं। इतना कहकर वह राजा के चरणों में गिर गया। तब राजा परीक्षित ने कहा-तुम अब मेरी शरण में हो, अब मैं तुम्हें मारूंगा नहीं लेकिन इसी समय मेरे राज्य से निकल जा। कलियुग ने कहा, महाराज पूरी पृथ्वी पर तो आपका ही राज्य है मैं कहां जाऊं तब राजा परीक्षित ने उसे चार स्थान रहने को दिए। राजा ने कहा तुम गंदगी, हिंसा, वेश्यालय और जुए के धन में निवास कर सकते हो।
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राजा परीक्षित की बातें सुनकर कलियुग ने एक और स्थान रहने को मांगा, तब राजा ने उसे सोने अर्थात स्वर्ण में निवास करने को कहा। इस अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, प्रधान मनमोहन छतवाल, पवन छाबड़ा, सुरेंद्र मनीयानी, डॉ.अश्विनी मित्तल, पंडित विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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