कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सस्टेनेबल प्लानिंग, आर्किटेक्चर व सिविल इंजीनियरिंग (स्पेस-2026) का आयोजन किया गया जिसका समापन रविवार को हुआ। मुख्य वक्ता स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर व प्लानिंग नई दिल्ली के प्रोफेसर प्रो. मनोज माथुर रहे। प्रो. मनोज माथुर ने कहा कि देश के सतत विकास के लिए वैकल्पिक योजना, निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीकों की खोज आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से 125 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सम्मेलन के विषय हरित और सतत वास्तुकला, शहरी व क्षेत्रीय नियोजन, स्मार्ट और रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीक, परिवहन व्यवस्था, जल व अपशिष्ट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समाहित करते हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), जीआईएस और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी व्यापक चर्चा हुई।
प्रो. मनोज माथुर ने कहा कि सतत विकास आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुका है। संतुलित और समावेशी विकास के लिए योजना, वास्तुकला और सिविल इंजीनियरिंग में स्थिरता के सिद्धांतों को अपनाना अनिवार्य हो गया है। शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और 35 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरों में निवास कर रही है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल और संसाधन-संरक्षण आधारित निर्माण को प्राथमिकता देनी होगी।
सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. एचके शर्मा ने कहा कि सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाएं और प्रस्तुत शोधपत्र सतत योजना, वास्तुकला और सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ज्ञान और व्यवहार को नई दिशा देंगे और भविष्य के नवाचारों को प्रेरित करेंगे।
इस मौके पर डॉ. जितेंद्र सिंह यादव, डॉ. पंकज मुंजाल, डॉ. अमित के जागलान, आर्किटेक्ट गरिमा सिंह, प्रो. राजीव गर्ग, प्रो. कंचन गर्ग सहित अन्य छात्र, शोधार्थी और वैज्ञानिक मौजूद रहे।
वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को जलवायु के अनुरूप योजना और निर्माण में अपनाएं
मुख्य अतिथि प्रो. राजू पांडेय, डीन (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) व कार्यकारी निदेशक, एनआईटी कुरुक्षेत्र ने कहा कि वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को जलवायु के अनुरूप योजना और निर्माण में अपनाने से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। साथ ही फ्लाई ऐश, वेस्ट प्लास्टिक, रिसाइकल्ड एग्रीगेट, ब्लास्ट फर्नेस स्लैग, मार्बल डस्ट और स्टोन डस्ट जैसी वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस दिशा में अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रिइंफोर्स्ड कंक्रीट को पारंपरिक स्टील रिइन्फोर्समेंट के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।