कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य जयंत चाैधरी ने कहा कि आज किसान जाग चुका है और अपने हकों की लड़ाई लड़ रहा है। किसानों के आगे किसी का गरूर नहीं टिक पाया है और न ही टिक पाएगा। लिहाजा समय आ गया है कि अब खेत से लेकर सत्ता तक किसानों की भागीदारी जरूरी है।
वे वीरवार को पिपली अनाजमंडी में भारतीय किसान यूनियन चढू़नी गुट की ओर से आयोजित जन आक्रोश रैली को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि संसद भवन नया बनाने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा, बल्कि हर गरीब व्यक्ति को मजबूत बनाने से होगा। लोकतंत्र में अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों को 13 माह तक आंदोलन करने की जरूरत नहीं होती। किसानों को आज हर रोज सड़कों पर उतरने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ रहा है कि उनकी सरकार में भागीदारी नहीं है। चौधरी छाेटू राम और चौधरी चरण सिंह भी कहते थे कि किसान का भला तब हो सकता है कि जब वह खेत के साथ-साथ सत्ता में भी भागीदार होगा। इसी उद्देश्य से चरण सिंह प्रधानमंत्री बने थे और किसान हित में कई फैसले भी लिए थे।
उन्होंने कहा कि किसानों के बीच कोई राज्य, धर्म, जाति की सीमा नहीं है। सभी का रोटी और बेटी का संबंध है। ऐसे में एमएसपी समेत किसानों की हर मांग सभी किसानों की है और इन्हें पूरा करने का रास्ता दिल्ली से ही निकलेगा। उधर पत्रकारों से चर्चा में जयंत चौधरी ने कहा कि यह राष्ट्रीय लोकदल के हरियाणा व दूसरे प्रदेशों में जमीन तलाशने का नहीं बल्कि किसानों के हित का मुद्दा है।
इस दौरान जयंत चौधरी ने हरियाणा सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यहां प्रदेश सरकार को किसानों व आमजन के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। रैली में यूनियन के हरियाणा कार्यकारी अध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, उत्तराखंड के अध्यक्ष गुरसेवक, पश्चिमी उत्तरप्रदेश प्रभारी सूबे सिंह डागर, हिमाचल प्रदेशाध्यक्ष तरसेम सिंह संगी, पंजाब अध्यक्ष दिलबाग सिंह सहित उत्तरप्रदेश के कई वर्तमान व पूर्व विधायकों व अन्य किसान नेताओं ने भी संबोधित किया।
अब आंदोलन से लेकर राजनीति तक आर-पार होगा : चढूनी
भाकियू के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी ने किसानों की एमएसपी से लेकर अन्य मांगें उठाते हुए कहा कि अब आंदोलन से लेकर राजनीति तक आर-पार होगा। इससे पहले उन्होंने रैली में मौजूद किसानों व अन्य लोगों से समर्थन लिया कि उन्हें राजनीति का रास्ता अपनाना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि राजनीति हो या फिर आंदोलन सब कुछ आर-पार का होगा। इन दोनों मुद्दों पर उन्होंने किसानों के हाथ खड़े करवा समर्थन लिया।
चढ़ूनी ने कहा कि किसानों के साथ किसी भी स्तर पर अन्याय नहीं होने देंगे। समर्थक यदि चाहेंगे तो वर्ष 2024 में चुनाव भी लड़ा जाएगा, क्योंकि लोकसभा और विधानसभा में किसानों की आवाज उठाने वाले हमारे किसान भाई सांसद और विधायक के रूप जरूर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अमीर-गरीब के बीच की खाई मिटाने का प्रयास है और उन्हें उम्मीद है वे सफल होंगे। चढू़नी ने कहा कि आज युवा रोजगार न मिलने पर विदेशों में पलायन कर रहे हैं। अब देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों की जमीनें भी उद्योग जगत को देने की तैयारी है जबकि किसानों के पास किसानी के लिए मुश्किल से ही 10 वर्ष बचे हैं, क्योंकि इसके बाद बड़ी कंपनियां ही खेती करेंगी।
यह धर्मयुद्ध होगा, जिसकी शुरूआत कुरुक्षेत्र से हुई : धर्मेंद्र यादव
उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भतीजे सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि किसानों का सत्ता तक पहुंचना बेहद आवश्यक है और इसमें उनकी पार्टी किसानों के साथ खड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यह किसानों का धर्मयुद्ध है और महाभारत भी कुरुक्षेत्र में ही हुआ था और इस युद्ध की शुरूआत भी यहीं से हो रही है। इसमें धर्म की जीत होगी। किसानों के पहले कई बड़े आंदोलनों की शुरूआत भी यहीं से हुई थी और सफल भी हुए। उन्होंने कहा कि गुरनाम सिंह चढू़नी चाहेंगे तो उनकी पार्टी उन्हें हरियाणा से भी मौका देने को तैयार है।