कुरुक्षेत्र/पिहोवा। पिहोवा में धान घोटाले का मुद्दा मंगलवार को उस समय फिर चर्चा में आ गया जब जिला खाद् एवं पूर्ति नियंत्रक द्वारा न केवल इसकी जांच शुरू की गई बल्कि भारतीय किसान यूनियन की ओर से उन्हें सुबूत भी सौंपे गए। जांच कमेटी के समक्ष यूनियन के पिहोवा प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच उपस्थित हुए, जहां उन्होंने राइस मिलरों की वायरल हुई ऑडियो की क्लिपिंग पैन ड्राइव के माध्यम से सौंपी। यही नहीं कई अन्य सुबूत भी उन्होंने कमेटी के समक्ष रखे, जिनकी कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। अब कमेटी इन सभी सुबूतों की जांच रिपोर्ट विभागाध्यक्ष को सौपेंगी, जिसके अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रिंस वड़ैच ने बाद में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि दो राइस मिलों पर भौतिक जांच के दौरान अनियमितता मिलने पर एफआईआर भी संबंधित विभाग द्वारा दर्ज कराई गई। पिहोवा मंडी की पूरी खरीद की जांच सीबीआई या विजिलेंस ब्यूरो द्वारा करवाई जाए व जो प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है उनकी जांच एक आईपीएस अधिकारी द्वारा करवाई जाए क्योंकि घोटाले की राशि करोड़ों में है व इसके तार विभिन्न विभागों, आढ़तिया व कर्मचारियों से जुड़े हुए हैं ।
उन्होंने कहा कि पिछलें दिनों तीन ऑडियो क्लिप्स व एक हिसाब किताब का दस्तावेज, जिनमें 15000 रुपये प्रति मिल एक दुकान 113 नंबर पर इक्कठे करके पीवी टीम को देने की बात की जा रही है व दूसरे हिसाब किताब के दस्तावेज में कितने रुपये किस विभाग के किस कर्मचारी या अधिकारी को दिए गए, इसका उल्लेख है। यह संगठित अपराध (घोटाले) की और इशारे करता है। इसकी भी उच्च स्तरीय जांच उच्च स्तर पर कराई जाए। उन्होंने तीनों वायरल ऑडियो क्लिप्स व स्क्रीनशॉट व हिसाब किताब की लिस्ट पेन ड्राइव में सौंपे हैं। उधर डीएफएससी नरेश कुमार कुमार का कहना है कि अभी कमेटी सौंपे गए सुबूतों की जांच करेगी, जिसके बाद अगली कार्रवाई होगी।
डीएफएससी व हैफेड द्वारा किया गया नियमावली का उल्लंघन
प्रिंस वड़ैच के मुताबिक धान अलाटमेंट करते समय डीएफएससी व हैफेड द्वारा नियमावली का उल्लंघन किया गया है, ऐसे राइस मिल जो एक ही परिसर में है, अलग से बाउंड्री नहीं है उन्हें दो -दो अलग अलग नाम से अलाटमेंट कर दी गई है जो पीवी के दौरान एक मिल के नाम पर दोनों मिलों का धान अधिकारी को दिखा देते हैं व जिन मिलों की न तो बाउंड्री है व न ही मिलिंग मशीन चलने की हालत में है उन्हें भी धान अलॉट कर दिया गया है।