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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: अंतिम दिन लोकसंस्कृति की बिखरी अनुपम छटा, पर्यटकों ने देखी श्रीकृष्ण की लीलाएं

Sun, 24 Dec 2023 10:44 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

अंतिम दिन लोकसंस्कृति की अनुपम छटा बिखरी। श्रीकृष्ण की लीलाएं देख पर्यटक भी लटा पटा हो गए। स्टेट और कंट्री पार्टनर सहित अन्य स्थानों से आए कलाकारों ने रंग जमाया इससे दर्शक भी संग झूमे। 
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मयूर नृत्य की प्रस्तुति देते मथुरा के कलाकार। - फोटो : भारत भूषण।
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते 18 दिनों तक धर्मनगरी के पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर अध्यात्म, संस्कृति एवं कला का अनूठा संगम रहा। रविवार को अंतिम दिन भी यहां अध्यात्म से लेकर लोक संस्कृति एवं शिल्पकला की धूम रही। छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने लोक संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। इससे पहले शनिवार को देर शाम सांस्कृतिक संध्या में महोत्सव के कंट्री पार्टनर श्री लंका के कलाकारों ने भी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में इस बार असम स्टेट पार्टनर रहा, जहां से 150 कलाकार धर्मनगरी के ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे। इन कलाकारों ने महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को भी बिहू नृत्य के साथ-साथ संस्कृति को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया, जिसे पर्यटकों ने भी जमकर सराहा। वहीं महोत्सव में असम से 50 से ज्यादा शिल्पकार भी पहुंचे, जिन्होंने करीब 50 लाख रुपये का कारोबार किया।
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महोत्सव से दो दिन पहले ही इन शिल्पकारों का अधिकतर सामान बिक गया। महोत्सव में बनाए गए असम के पवेलियन में पर्यटकों को इस प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, खानपान और शिल्पकला से रूबरू होने का भी मौका मिला। मुख्य मंच पर कलाकारों ने भारत वर्ष की प्राचीन संस्कृति को सहेजने का काम किया।
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इन कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया। फिर महाभारत और श्रीकृष्ण की लीलाओं को मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव विभौर कर दिया।

हरियाणवी पवेलियन मेंं बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मंच पर थिरके

महोत्सव में अंतिम दिन रविवार को हरियाणवी पवेलियन आकर्षण का केंद्र बना रहा, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग कलाकारों ने भी मंच पर खूब धूम मचाई।

पर्यटक भी हरियाणवी गीतों की थाप पर झूमने को मजबूर हो गए। इस पवेलियन के जरिए देश-विदेश से आए पर्यटकों ने यहां की सांस्कृतिक विरासत, खानपान और शिल्पकला भी करीब से देखी।

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