बाबैन। लोगों का दुख दूर करने का दावा करने वाली सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संस्थाएं अपने काम का बखान करने के लिए पेड़ों को जख्मी करने से भी बाज नहीं आ रही हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये संस्थाएं इस बात से अनभिज्ञ हैं। पर्यावरण दिवस आने पर यहीं संस्थाएं पौधरोपण करने का दावा भी करती हैं और इस काम के प्रचार के लिए इन्हीं पेड़ों को माध्यम बनाती हैं।
यूं तो सरकार भी पौधरोपण के प्रति काफी गंभीर हैं, क्योंकि पेड़ ही तेजी से दूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने का सबसे अच्छा और सस्ता माध्यम हैं। सरकार दूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों को पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ का नारा दे रही है।
सरकार के इन प्रयासों पर राजनैतिक पार्टियों के नेता, धार्मिक, शिक्षण और समाजसेवी संस्थाओं के लोगजमकर कुठाराघात कर रहे हैं। जनता में अपनी पहचान बनाने के उद्देश्य से इनके प्रतिनिधि सड़कों के किनारे खडे़ वृक्षों के ऊपर होर्डिंग लगाने के लिए लोहे की मोटी-मोटी कीलों को वृक्षों के तनों में ठोक कर वृक्षों के जीवन के साथ भारी खिलवाड़ कर रहे हैं। चुनाव का समय हो या कोई रैली हो या फिर दाखिलों का समय वृक्षों पर होर्डिंग लगाने का प्रचलन दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
क्षेत्र के महेंद्र सिंंह, अजय कुमार और प्रवीण कुमार का कहना है कि वैसे तो सरकारी और गैर सरकारी समारोहों में पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है और आम जनता को पौधरोपण करने के प्रति सचेत करने के लिए बडे़-बड़े भाषण दिए जाते हैं, दूसरी ओर राजनैतिक दलाें के नेताओं, सामाजिक और शिक्षण संस्थाओं की ओर से पेड़ों को सरेआम नष्ट किया जा रहा है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि प्रशासन ऐसे नेताओं, धार्मिक संस्थाओं के संचालकों, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई करे, जो पेड़ों पर कील गाड़कर होर्डिंग लगाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन इसके प्रति सचेत नहीं हुआ तो पर्यावरण को स्वच्छ रखने वाले पेड़-पौधों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और शुद्ध और स्वच्छ पर्यावरण एक सपना बनकर रह जाएगा।