लाडवा। टमाटर के दामों में आई गिरावट के कारण टमाटर उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। आलम ये है कि टमाटर के बेहद कम दाम मिलने से किसान कर्जदार हो गए हैं।
सब्जियों का राजा कहा जाने वाला टमाटर आज दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इस कारण किसान और मजदूर भी कर्ज के बोझ तले दबे हैं, जबकि टमाटर खरीदने वाले व्यापारी और दुकानदार किसान से सस्ते टमाटर खरीदकर आम ग्राहकों को कुछ महंगे दामों में बेच रहे हैं।
लाडवा क्षेत्र के किसान अनिल गर्ग, रणबीर सिंह बपदी, साहब सिंह बपदी, सोमनाथ लाडवा, सुभाष बनी, मेनपाल बुढ़ा, कृष्णलाल हलालपुर, विरेंद्र सिंह अंटेड़ी, जसबीर छलौंदी, मायाराम जंदेडा और सतपाल जंदेड़ा का कहना है कि इस बार टमाटरों में किसानों को भारी नुकसान है। किसानों कहना है कि पिछले वर्ष टमाटर की खेती किसानों के लिए वरदान बनकर आई थी।
किसानों ने पिछले वर्ष टमाटर की फसल से प्रति एकड़ एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक कमाया था, लेकिन इस बार टमाटर के दाम बेहद कम है। इस कारण टमाटर की फसल की लागत कीमत भी नहीं निकल पा रही है। टमाटर की प्रति एकड़ फसल उगाने पर लगभग 20 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन टमाटर के बेहद कम दाम आने से उन्हें लागत कीमत भी नही मिल पाई है।
बन के किसान अनिल गर्ग का कहना है कि अगर क्षेत्र से दिल्ली मंडी में टमाटरों को बेचने के लिए ले जाया जाए तो गाड़ी का भाड़ा ज्यादा व टमाटरों की कीमत कम मिल रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि वह एक दिन अपने टमाटर दिल्ली मंडी में 30 पैसे प्रति किलो के हिसाब से बेच कर आए हैं।